क्यों ना पूछें पुलवामा पर मोदी से ये सवाल?

अभिनंदन के पाकिस्तान में होने की ख़बर जब पूरी दुनिया में फैल चुकी थी तो मोदी जी 'मेरा बूथ, सबसे मज़बूत' कार्यक्रम का ऐलान कर रहे थे. अब तक एक शब्द अभिनंदन पर नहीं निकला उनके मुंह से.
-दिलीप खान



बस याद दिला रहा हूं.

  • जब पुलवामा में हमला हुआ तो मोदी जी डिस्कवरी चैनल के लिए फोटो शूट करा रहे थे. हमले के बाद तक वो शूटिंग में व्यस्त रहे. रुद्रपुर में मोदी को एक रैली को संबोधित करना था, लेकिन रामनगर में बढ़िया एंगल से फोटो खिंचवाने के चक्कर में वहां भी नहीं गए. मीडिया ने कुछ नहीं पूछा.
  • पुलवामा हमले के बाद की स्थिति पर बात करने के लिए सर्वदलीय बैठक बुलाई और ख़ुद निकल लिए चुनावी रैली करने. सारी पार्टियों के नेता आ गए, मोदी जी नदारद! टीवी मीडिया ने कुछ नहीं पूछा.
  • जब अधिकतर पार्टियों के नेताओं ने अपने कार्यक्रम रद्द कर दिए और सबने कह दिया वो इस वक़्त सरकार के साथ खड़े हैं तो मोदी फिर पहुंच गए रैली करने. झांसी, धुले, बरौनी और हज़ारीबाग में कुल चार रैलियां कीं. 
  • फिर पाकिस्तान से लौटे मोहम्मद बिन सलमान को गले लगाने के लिए प्रोटोकॉल तोड़कर हवाई अड्डा पहुंच गए.
  •  बालाकोट में हमला हुआ और मोदी जी उसी दिन चुरु पहुंच गए रैली करने. मंच पर पुलवामा हमले में मारे गए जवानों की तस्वीरें लगाकर 'देशभक्ति' बेचने लगे. वो कोई शोक/श्रद्धांजलि सभा थी क्या?
  • अगले दिन विंग कमांडर अभिनंदन जब पाकिस्तान की कस्टडी में थे तो मोदी जी 'खेलो इंडिया' ऐप का उद्धाटन कर रहे थे. वो देश को खेलने की तमीज़ समझा रहे थे.
  • अभिनंदन के पाकिस्तान में होने की ख़बर जब पूरी दुनिया में फैल चुकी थी तो मोदी जी 'मेरा बूथ, सबसे मज़बूत' कार्यक्रम का ऐलान कर रहे थे. अब तक एक शब्द अभिनंदन पर नहीं निकला उनके मुंह से.
  • 'मेरा बूथ, सबसे मज़बूत' तय समय से शुरू हुआ. बीजेपी आइटी सेल वालों ने इसे ट्वीटर पर टॉप ट्रेंड कराया. उधर पाकिस्तान ने अभिनंदन को छोड़ने का फैसला किया तो मोदी जी ने इसे 'पायलट प्रोजेक्ट' करार दिया. अभिनंदन इनके लिए 'पायलट प्रोजेक्ट' हैं. भाषा में ज़रा भी संजीदगी नहीं, ज़िम्मेदारी नहीं. श्रेय चाहिए सिर्फ़.
  • और हां, बीच में एक दिन कांग्रेस ने प्रेस कांफ्रेंस कर जब ये सवास पूछा कि हमले के बाद भी आप फोटोशूट क्यों करा रहे थे, तो इंडिया टुडे में एक ख़बर प्लांट करवा दी कि हमले के बाद मोदी जी ने खाना बंद कर दिया था.



दिलीप खान पत्रकार हैं.
आलेख उनकी फ़ेसबुक वॉल से साभार.