Health Praxis: ठंडी और गर्म सिंकाई का फ़र्क

अलग-अलग स्थितियों में डॉक्टर अलग अलग सिंकाई की सलाह देते हैं. डॉ स्कन्द शुक्ला से जानें इसकी वजह..

अकसर जोड़ों की बीमारियों या चोटों से पीड़ित रोगी गर्म-ठण्डी सिंकाई के बारे में पूछते हैं। इस बाबत कुछ स्थूल बातें बताना ज़रूरी समझता हूँ।
ठण्ड के स्वभाव को समझें। ठण्ड के प्रभाव से त्वचा की रक्तवाहिनियाँ सिकुड़ती हैं। ( यद्यपि इसके कुछ अपवाद भी हैं।) नतीजन सूजन घटती है और दर्द भी। इसलिए ठण्डी सिंकाई ( बर्फ़-इत्यादि से ) वहाँ लाभप्रद है, जहाँ नयी-नयी चोट लगी हो। यही कारण है कि हड्डी-मांस की ताज़ी चोट में डॉक्टर राइस का सिद्धान्त अपनाते हैं : आर ( रेस्ट यानी आराम ) , आई ( आइस यानी बर्फ़ ) , सी ( कम्प्रेशन यानी दबाव ) और ई ( एलेवेशन यानी ऊँचा रखना )। इन चार बातों से ताज़ी चोट में सूजन कम आएगी और दर्द भी कुछ घट जाएगा। बाक़ी जो करना है , वह तो डॉक्टर फिर करेंगे ही।
हड्डी-मांस की नयी चोट जिसे एक्यूट इंजरी कहा गया है , इसलिए सूजती और दर्द करती है क्योंकि इसमें चोट के कारण रक्तप्रवाह बढ़ जाता है। ऐसा इसलिए क्योंकि खून ले जानी वाली वाहिनियाँ फैल जाती हैं और उनकी दीवारें भी अधिक भुरभुरी ( यानी छिद्रदार / पोरस ) हो जाती हैं। नतीजन चोट के स्थान पर ढेरों रसायन जमा होने लगते हैं और कोशिकाएँ भी। इन्हीं के कारण दर्द भी उठता है और सूजन भी बढ़ती है।
जब आप नयी चोट में तुरन्त बर्फ़ का इस्तेमाल करते हैं , तो ठण्ड के कारण रक्तवाहनियाँ सिकुड़ती हैं। घटनास्थल पर कोशिकाएँ कुछ कम पहुँचती हैं और रसायन भी कम जमा होते हैं। नतीजन सूजन और दर्द घटते हैं। यही बात राइस का आधारबिन्दु है।
अब आएँ गर्म सिंकाई पर। अगर किसी को महीनों-सालों से किसी जोड़ में या कमर-इत्यादि में दर्द है, तो गर्म सिंकाई लाभप्रद होती है। कारण कि गर्मी का प्रभाव उलटा है। इसके कारण रक्तवाहिनियाँ फैलती हैं। घटनास्थल की जाम मांसपेशियाँ ढीली पड़ती हैं , उनका स्पाज़्म कम पड़ जाता है। वहाँ जमा दर्दकारी व सूजनकारी रसायन बढ़े रक्तसंचार के कारण बह जाते हैं। नतीजन रोगी को आराम की अनुभूति होती है।
मोटी बात यह है कि तुरन्त लगी चोट में ठण्डी सिंकाई और महीनों-सालों की पुरानी चोट अथवा हड्डी-मांसपेशी के दर्द में गर्म सिंकाई लाभदायक होती हैं। उलटा करने पर कई बार नुकसान भी उठाना पड़ सकता है। यानी पुरानी चोट या गठिया में ठण्ड के कारण अकड़न और दर्द बढ़ सकते हैं और नयी चोट की सूजन व दर्द गर्म सिंकाई के कारण बदतर हो सकते हैं।
( अब इसके भी कई अपवाद या परिष्कार हो सकते हैं , जो यहाँ बताने से चीज़ें भ्रमकारी होंगी। इसलिए ऐसे में डॉक्टर व फ़िज़ियोथेरेपिस्ट से उचित मार्गदर्शन ले लेना ही समझदारी है। )