नामवर सिंह का निधन

हिंदी साहित्य के नामी-गिरामी चेहरों और लेखक संगठनों ने नामवर सिंह को श्रद्धांजलि दी है.


और नामवर चले गए. उम्र और उपलब्धियों के लिहाज़ से उनके हिस्से लगभग सब कुछ आया. वे हिन्दी के एक शिखर विद्वान रहे. उनका जाना हिंदी के कई युगों के अवलोकक और पारखी का अवसान है. 92 वर्ष से अधिक की उम्र में भी वे हिन्दी में हमेशा एक अनिवार्य उपस्थिति की तरह थे. हालांकि ​बीते समय में कई वजहों से नामवर सिंह विवाद का ​विषय भी बने.

हिंदी साहित्य के नामी गिरामी चेहरों और लेखक संगठनों ने नामवर सिंह को श्रद्धांजलि दी है. जन वादी लेखक संघ ने एक विज्ञप्ति जारी करते हुए लिखा है, ''भारत से लेकर विश्व के अन्य हिस्सों तक के साहित्य और सराहना-प्रणालियों का ऐसा विशद ज्ञान, ऐसी तलस्पर्शी विश्लेषण-क्षमता, ऐसी भाषा और प्रत्युत्पन्नमति और आलोचना का ऐसा लालित्य अब हमारे बीच दुर्लभ है. 70 वर्षों की साहित्यिक सक्रियता में नामवर जी ने कभी अपने को पुराना नहीं पड़ने दिया. अपने ज्ञान को हमेशा अद्यतन रखना, नयी-से-नयी चीज़ें पढ़ना और उन्हें अपनी व्याख्या तथा व्याख्यान का हिस्सा बनाना नामवर जी से ही सीखा जा सकता था.''

नामवार सिंह को श्रद्धांजलि.