जेटली किस मुंह से कह रहे हैं 'रफ़ाल पर ‘महागठबंधन’ का झूठ सामने आ गया?'

दि हिंदू के ​​पूर्व संपादक एन. राम की रफ़ाल डील पर सिलसिलेवार रिपोर्टों से जहां एक ओर हिंदुस्तानी राजनीतिक गलियारों में धमाके गूंज रहे हैं वहीं सरकार खुद को बेक़सूर ठहराने की जद्दोज़ेहत में जुटी दिखाई दे रही है. इसी सिलसिले में रफ़ाल सौदे पर राज्य सभा में बुधवार को सीएजी की रिपोर्ट पेश की गई. इस रिपोर्ट को सरकार ने क्लीन चिट की तरह पेश किया है. वरिष्ठ भाजपा नेता अरुण जेटली ने रिपोर्ट के पेश किए जाने के बाद ट्वीट किया, "सत्यमेव जयते... 2007 के मुकाबले 2016 में सस्ती कीमत पर विमान खरीदे गए हैं. इसे जल्द डिलीवर किया जाएगा, बेहतर मेनटेनेंस भी होगा."
हालांकि, जहां एक ओर एन. राम की रिपोर्ट्स् और सीएजी की रिपोर्ट में विरोधाभाष हैं, वहीं कई विरोधाभाष इस रिपोर्ट और सरकार द्वारा जिस तरह इसे पेश किया जा रहा है, उसमें भी हैं.  पत्रकार दिलीप खान ने इन विरोधाभाषों को अपनी फ़ेसबुक वॉल पर सिलसिलेवार ढंग से सामने रखा है. पढ़ें -



किस मुंह से अरुण जेटली कह रहे हैं रफ़ाल पर ‘महागठबंधन’ का झूठ सामने आ गया? कहां से लाते हैं इतना आत्मविश्वास? विपक्ष और द हिंदू की तरफ़ से जो आरोप लगे हैं उनमें से ज़्यादातर पर कैग की रिपोर्ट ने मुहर लगा दी है.

  1. दि हिंदू ने कहा था कि मोदी सरकार ने फ्रांस सरकार से बैंक/सरकारी/स्वायत्त गारंटी नहीं ली और ना ही एस्क्रॉ एकाउंट बनवाया. कैग की रिपोर्ट में भी ये सवाल उठाए गए हैं कि महज ‘आश्वासन पत्र’ के आधार पर डील करने से भारत को नुक़सान है.
  2.  कैग की रिपोर्ट में साफ़ कहा गया है कि 2007 के यूपीए के सौदे में अग्रिम भुगतान के बदले 15 फ़ीसदी बैंक गारंटी का प्रावधान था, जिसे मोदी सरकार ने ख़त्म कर दिया.
  3. यानी, अगर दसॉ एविएशन समझौते का उल्लंघन करता है तो भारत फ्रांस सरकार से कुछ नहीं मांग सकता. भारत को पहले दसॉ के साथ क़ानूनी प्रक्रिया से गुज़रना पड़ेगा. मध्यस्थता की शर्तों को भी अगर दसॉ पूरी करने में नाकाम करता है तो ‘सारी क़ानूनी प्रक्रियाओं’ को पूरी करने के बाद ही फ्रांस सरकार इसमें हस्तक्षेप करेगी.
  4. रविशंकर प्रसाद किस मुंह से मोदी सरकार की रफ़ाल डील का समर्थन करते हैं? ख़ुद क़ानून मंत्रालय ने कहा था कि सौदे में सरकारी/स्वायत्त गारंटी लेना उचित होगा. कैग की रिपोर्ट में ये कहा गया है. यानी, रविशंकर प्रसाद ख़ुद अपने मंत्रालय की भी नहीं सुन रहे.
  5. द हिंदू ने सवाल उठाया था कि डिजाइन एंड डेवलपमेंट की क़ीमत बढ़ी है. कैग की रिपोर्ट ने माना है कि भारतीय वायु सेना के प्रदर्शन आधारित साज़ो-सामान की क़ीमत 6.54 फ़ीसदी बढ़ी है. यही नहीं ट्रेनिंग लागत में भी 2.68 फ़ीसदी का इज़ाफ़ा हुआ है.
  6. कैग ने स्वीपिंग तरीक़े से कह दिया कि रफ़ाल की पूरी डील 2007 से 2.86 फ़ीसदी सस्ती है, लेकिन रिपोर्ट में कहीं भी दाम का खुलासा नहीं किया गया. कहीं नहीं जहाज़ की क़ीमत बताई गई.
  7. द हिंदू ने आरोप लगाया था कि बेंचमार्क प्राइस (यानी सौदेबाज़ी से पहले भारत की तरफ़ से तय अधिकतम मूल्य) में 55.6 फ़ीसदी का इज़ाफ़ा हुआ. डिसेंट नोट के बाद भी मोदी जी ने अंतर-सरकारी क़रार में इसे मंज़ूरी दे दी.
  8. कैग की रिपोर्ट में ऑफसेट पार्टनर (यानी अनिल अंबानी) पर कुछ नहीं बोला गया. अरुण जेटली इस पर भी फुदक रहे हैं. जब रिपोर्ट में ऑफसेट के बारे में बताया ही नहीं गया है तो नाम क्या खाक़ लिया जाएगा. ये तो सरकार भी मान रही है कि अंबानी पार्टनर है. अब किसके लिए भ्रष्टाचार संबंधी नियमों की छूट दी गई थी ये बताए मोदी सरकार.