दो पैग़ रेड वाइन का सच!

"..यह दलील दी गयी कि शराब हृदयाघात रोकती है अगर कम मात्रा में पी जाए। दो पैग का जुमला चल पड़ा। कारण ? शराब में पॉलीफिनॉल नामक रसायन होते हैं। इन पॉलीफिनॉलों में रेज़वेराट्रॉल प्रमुख है। लाल वाइन अंगूरों से बनायी जाती है। अंगूरों में रेज़वेराट्रॉल होता है। आप थोड़ी-थोड़ी लाल वाइन पीते रहें , तो आपको रेज़वेराट्रॉल मिलता रहेगा और हृदय को स्वस्थ रखेगा। बात यह है कि मैं अपने हृदय को स्वस्थ रखने के लिए सीधे अंगूर क्यों न खा लूँ ?.." 
-डॉ स्कन्द शुक्ला

रूढ़िवादी से कुछ कराना हो, तो परम्परा की दुहाई दीजिए : वह समाज का भोला बच्चा है, झुक जाएगा। लेकिन तर्कवादी से कुछ कराना हो , तब क्या किया जाए ?
मामला शराब का है। दो पैग मदिरा के ( विशेषकर लाल वाइन ) सेहत के लिए अच्छे होते हैं --- पुराना और घिस चुका जुमला है। यह अपनी मृत्युगति को पा चुका है , लेकिन जब-तब कब्र से उठ खड़ा होता है। वे जो विज्ञान को श्रुति-परम्परा से ग्रहण करते हैं , इस झाँसे में फँसते हैं। अथवा कई बार जब हमें किसी बात का औचित्य ठहराना होता है , तो हम अपने मतलब के पुराने-नये नतीजे चुनते हैं और सम्पूर्ण निष्कर्ष को नज़रअंदाज़ कर देते हैं।
झूठी सिद्ध हो चुकी यह मान्यता फ़्रांस से उठी , जब यह पाया गया कि फ्रांसीसियों में ह्रदयाघात व अन्य हृदयरोग शेष यूरोपीय लोगों व अमरीकनों से कम देखने को मिलते हैं। बावजूद इसके कि फ्रांसीसी जम कर सैचुरेटेड वसा का सेवन करते हैं। बता दूँ कि चिकित्सा-विज्ञान का मुख्य धड़ा अभी तक मानता आया है कि सैचुरेटेड वसा खाने से हृदयाघात-जैसे रोगों का ख़तरा बढ़ जाता है। लेकिन फ्रांसीसियों में फिर तुलनात्मक कमी क्यों पायी गयी ?
कई सम्भावनाएँ सोची गयीं। कई पर विचार हुआ। यह कहा गया कि सम्भवतः फ्रांसीसी आँकड़े ढंग से जमा न किये गये हों , इसलिए ऐसा देखने को मिल रहा हो। फिर यह बात उठी कि फ्रांसीसी अच्छी मात्रा में कच्चे फल-सलाद और रेशेदार भोजन करते हैं , जो ख़ून में बुरी वसा को घटाते और कई अन्य तरीक़ों से भी हृदयरोग रोकते हैं। फ्रांस में बाक़ी यूरोप व अमेरिका की तुलना में फल-सब्ज़ी-मोटे अनाज की खपत ज़्यादा है।
अब आइए वाइन व शराब के झूठ पर। यह दलील दी गयी कि शराब हृदयाघात रोकती है अगर कम मात्रा में पी जाए। दो पैग का जुमला चल पड़ा। कारण ? शराब में पॉलीफिनॉल नामक रसायन होते हैं। इन पॉलीफिनॉलों में रेज़वेराट्रॉल प्रमुख है। लाल वाइन अंगूरों से बनायी जाती है। अंगूरों में रेज़वेराट्रॉल होता है। आप थोड़ी-थोड़ी लाल वाइन पीते रहें , तो आपको रेज़वेराट्रॉल मिलता रहेगा और हृदय को स्वस्थ रखेगा।
बात यह है कि मैं अपने हृदय को स्वस्थ रखने के लिए सीधे अंगूर क्यों न खा लूँ ? और फिर रेज़वेराट्रॉल जैसे पॉलीफिनॉल तो बाहर दस रुपये की चाय में भी ख़ूब मौजूद हैं। शराब से कत्तई कम नहीं। चाय-कॉफ़ी थोड़ी पी ली जाए , रेज़वेराट्रॉल पा लिया जाए। उसके लिए रेड वाइन या किसी अन्य शराब का आसरा क्यों लेना भला?
मदिरा-प्रवर्त्तक बताते रहे ( कुछ आज भी ) कि लाल वाइन में एंटीऑक्सीडेंट होते हैं। तो एंटीऑक्सीडेंट क्या सेब-सन्तरे-अनार-अंगूर-अनानास में नहीं हैं ? लेकिन कोई इन मदिरा-मसीहों से पूछे कि मनुष्य ऐसी मूर्खता क्यों करेगा कि वह आसानी से मिल सकने स्वास्थ्य-गुणवर्धकों के लिए महँगे बार और दारू के ठेकों के चक्कर लगाएगा ?
बाज़ार लेकिन बाज़ार है। वह हमको इतनी आसानी से नहीं छोड़ेगा। वह सिद्ध करेगा कि हममें मूर्खता के अंश कहीं-न-कहीं छिपे हैं। वाइन-उद्योग व शराब-व्यापार करने वाले यों ही नहीं लक्ष्मीपति बने घूम रहे। उन्हें उठाने में करोड़ों-करोड़ मूर्खों और स्वैगजीवियों की जमात लगी है।
ध्यान रहे मदिरा-उद्योग की इस रेजवेराट्रॉल-सम्बन्धी-अफवाह के जवाब में मैंने अभी शराब की ढेरों स्वास्थ्य और अर्थ-सम्बन्धी हानियाँ तो गिनायी ही नहीं हैं।
डॉ स्कन्द शुक्ला, चर्चित विज्ञान लेखक हैं. 
इनके फेसबुक पेज़ skandshukla22 पर आप कई ज्ञानवर्धक आलेख पढ़ सकते हैं.