सेती बांध पर नेपाल-चीन का करार रद्द, पंचेश्वर पर भारत-नेपाल क्या करेंगे?

“..चीन की सरकारी कम्पनी थ्री गॉर्ज कॉरपोरेशन ने इस परियोजना से अपने हाथ इसलिए पीछे खींचे हैं ​क्योंकि उसे लग रहा था कि वेस्ट सेती परियोजना अव्यावहारिक है और इसके चलते विस्थापन पु​नर्वास में भारी खर्चा होना था. जिससे यह परियोजना कॉस्ट इफैक्टिव नहीं रह जाएगी. ठीक यही सवाल पंचेश्वर बाँध को लेकर विशेषज्ञ भी उठा रहे हैं लेकिन क्या यहाँ सुनी जाएगी? कम से कम पंचेश्वर बाँध के प्रभावित क्षेत्र की जनता को सतर्क हो जाना चाहिए..”
-रोहित जोशी
भारत और नेपाल के बीच महाकाली संधि के तहत बनाए जा रहे पंचेश्वर बांध की क़वायदों के बीच पिछले दिनों नेपाल से एक ख़बर बेहद महत्वपूर्ण आई. नेपाली सरकार ने घोषणा की कि उसने चीन की सरकारी कंपनी, थ्री गॉर्ज कॉरपोरेशन के साथ एक समझौते को रद्द कर दिया है, जिसके तहत 1.5 बिलियन अमेरिकी डॉलर का ‘वैस्ट सेती हाइड्रो पावर प्रोजेक्ट’ बनाया जाना था.
750 मेगावॉट की इस जल विद्युत परियोजना को नेपाल में चीन की एक महत्वाकांक्षी परियोजना के तौर पर देखा जा रहा था. इसके लिए दोनों पक्षों के बीच 2012 में एमओयू साइन किया गया था.
नेपाली प्रधानमंत्री केपी ओली की अध्यक्षता में हुई इन्वेस्टमेंट बोर्ड नेपाल IBN की एक बैठक में एमओयू को रद्द करने और बांध बनाने के नए रास्तों पर काम का फ़ैसला लिया गया था.
इधर अंतराष्ट्रीय मीडिया का कहना है कि थ्री गॉर्ज कॉरपोरेशन ने इस परियोजना से अपने हाथ इसलिए पीछे खींचे ​क्योंकि उसे लग रहा था कि वैस्ट सेती परियोजना अव्यावहारिक है क्योंकि इसके चलते विस्थापन पु​नर्वास में भारी खर्चा होना था. जिससे यह परियोजना कॉस्ट इफैक्टिव नहीं रह जाएगी.
यह बात IBN की ओर से जारी विज्ञप्ति में भी कही गई थी कि इस परियोजना से थ्री गॉर्ज कॉरपोरेशन ने हाथ खींचे हैं, "वैस्ट सेती प्रोजेक्ट पर काम करने से थ्री गॉर्ज के मना करने के बाद एक टास्क फोर्स बनाई गई है जो कि परियोजना पर काम करने के लिए एक उचित मॉडल तैयार करेगी. ऊर्जा मंत्री, वित्त मंत्री और बोर्ड के सीईओ की तीन सदस्यीय टीम परियोजना पर काम करने के लिए एक उचित मॉडल की संस्तुति करेगी."
बताया जा रहा है पिछले साल अगस्त महीने में थ्री गॉर्ज कॉरपोरेशन की एक टीम ने काठमांडू का दौरा किया था और IBN के अधिकारियों के साथ एक बैठक कर वैस्ट से​ती प्रोजेक्ट में कुछ बदलाव के सुझाव दिए थे जिससे कि इस डैम को कॉस्ट ​इफैक्टिव बनाया जा सके. लेकिन इस बैठक से कोई हल नहीं निकला. इसके बाद सितम्बर में नेपाली सरकार ने आधिकारिक तौर पर थ्री गॉर्ज कॉरपोरेशन के साथ अपने समझौते के रद्द होने की घोषणा कर दी.
जिस आधार पर नेपाल और चीन की सरकारी कंपनी थ्री गॉर्ज कॉरपोरेश के बीच यह क़रार रद्द हुआ है, उसके आधार पर उत्तराखंड में भारत और नेपाल के बीच प्रस्तावित पंचेश्वर बांध पर भी सवाल उठते हैं. 750 मेगावॉट के वेस्ट सेती प्रोजेक्ट की तुलना में 5040 मेगावॉट का पंचेश्वर बांध 116 वर्गकिमी के क्षेत्रफल को अपनी चपेट में लेता है, जिसमें 13,700 हेक्टेयर जंगल और खेती की ज़मीन पूरी तरह डूब जाएगी. साढ़े तीन सौ से अधिक गांव इसकी चपेट में आने हैं और एक अनुमान के मुताबिक यह परियोजना 80 हज़ार लोगों को प्रत्यक्ष और परोक्ष रूप से प्रभावित करेगी.
बांधों के विशेषज्ञ हिमांशु ठक्कर कहते हैं, "पंचेश्वर बांध किसी भी तरह से कॉस्ट ​इफैक्टिव नहीं है. हमने जो स्टडी इस बांध पर ​की है उसके मुताबिक़ अगर यह बांध बन भी जाता है तो इससे पैदा होने वाली बिजली की क़ीमत न्यूनतम 6.50 से लेकर 8 रुपये प्रति यूनिट होगी. जबकि बाज़ार में अभी बिजली के दाम 3 रुपया प्रति यूनिट से ले​कर अधिकतम 4.50 रुपया प्रति यूनिट है. ऐसे में इस बिजली को कौन ख़रीदेगा?"
हिंमाशु ठक्कर आगे कहते हैं, "अगर यह कर चुकाने वाली जनता के पैसे से ना बनाया जा रहा हो, और किसी निजी कंपनी को इस बांध परियोजना को बनाने दे दिया जाए तो वह हाथ खड़े कर देगी. यह परियोजना बिल्कुल अव्यावहारिक है."
उधर पंचेश्वर बांध से प्रभावित होने वाले इलाक़ों में भी इस बांध को लेकर आशंकाएं बरकरार हैं. जहां एक ओर सत्तारूढ़ भाजपा के नेता, प्रधानमंत्री मोदी के इस पैट प्रोजेक्ट के ​लिए ग्रामीणों को यह आश्वासन दे रहें हैं कि उन्हें बढ़िया विस्थापन और पुनर्वास दिया जाएगा. वहीं स्थानीय लोगों में अपने भूगोल के साथ अपनी सभ्यता और संस्कृति के भी डूबने का भय बरकरार है.
‘महाकाली की आवाज़’ के समन्वयक शंकर सिंह खड़ायत कहते हैं, ”चीन की कंपनी ने भी बांध से बढ़ाचढ़ा कर बताए जाने वाले फ़ायदों को स्थानीय लोगों के विस्थापन और पुनर्वास की क़ीमत की तुलना में, कम आंका है. ज​बकि वेस्ट सेती की परियोजना पंचेश्वर की तुलना में काफी छोटी है और नुकसान का यह आंकलन सिर्फ पैसों की शक़्ल में किया गया है. इतने बड़े बांध में जो भूगोल डूबेगा, उसकी सभ्यता और संस्कृति को होने वाले नुकसान का तो अनुमान भी नहीं लगाया जा सकता क्योंकि वह अनमोल चीज़ है. पैसों में नहीं तोली जा सकती.”