तो यह है, 'विकास का नया विजन?'


"..इसे कहते हैं: 'विकास का नया विजन!' भारत ऐसा 'विश्वगुरू' बनने वाला है कि पूरी दुनिया उस पर हंसा करेगी और हम आम भारतीय रोते रहेंगे! कुलीन कारपोरेट, राजनेता, नौकरशाह और अन्य धननासेठ अपने बच्चों को विदेश पढ़ा रहे हैं, अपना इलाज भी विदेश ही करा रहे हैं। हम और आप जात-पात, मंदिर-मस्जिद और गाय-गोबर में उलझकर असल सवालों पर सोए रहें! जिंदगियां तो आम भारतीय की तबाह हो रही हैं! पर उसके बड़े हिस्से को इस बात का एहसास तक नहीं!.."
-उर्मिलेश


इसे कहते हैं 'विकास का विजन!' देश के अनेक केंद्रीय और राज्यों के मातहत आने वाले विश्वविद्यालयों, प्रौद्योगिकी संस्थानों और महाविद्यालयों में फीस बेतहाशा बढ़ाई गई है। अगले सत्र से और बढ़ाई जानी है। ऐसे संस्थानों की संख्या भी सीमित की जा रही है। दूसरी तरफ, मोटी फीस वाले निजी विश्वविद्यालयों और महाविद्यालयों की संख्या बेतहाशा बढ़ाई जा रही है, जहां आम घरों के बच्चों का पढ़ना असंभव सा है। उच्च शिक्षा में निजी क्षेत्र के संस्थान अब लगभग 68 फीसदी हो गये हैं।

बढ़ती आबादी के हिसाब से देखें तो प्राथमिक और उच्च शिक्षा पर सरकारी खर्च में निरंतर कमी हो रही है। वंचित या आर्थिक रूप से कमजोर समुदाय के छात्रों की छात्रवृत्ति रोक दी गई है या कटौती की गई है।


दूसरी तरफ यूपी जैसे बड़े राज्य में कुछ बाबाओं-स्वामियों-साधुओं को पेंशन देने की शुरुआत हो रही है। लोकतंत्र की रक्षा के सेनानी होने के नाम पर कुछ जिलों में असामाजिक तत्व भी बीस-बीस हजार रुपये-पैसे महीना पा रहे हैं। कुछ राज्यों में सामाजिक सुरक्षा के नाम पर गौरक्षकों को भी भुगतान होते रहे हैं।

इसे कहते हैं: 'विकास का नया विजन!' भारत ऐसा 'विश्वगुरू' बनने वाला है कि पूरी दुनिया उस पर हंसा करेगी और हम आम भारतीय रोते रहेंगे! कुलीन कारपोरेट, राजनेता, नौकरशाह और अन्य धननासेठ अपने बच्चों को विदेश पढ़ा रहे हैं, अपना इलाज भी विदेश ही करा रहे हैं। हम और आप जात-पात, मंदिर-मस्जिद और गाय-गोबर में उलझकर असल सवालों पर सोए रहें! जिंदगियां तो आम भारतीय की तबाह हो रही हैं! पर उसके बड़े हिस्से को इस बात का एहसास तक नहीं!


उर्मिलेश वरिष्ठ पत्रकार हैं।
टिप्पणी उनके फ़ेसबुक पेज़ से साभार।