किताब : केन सारो-वीवा : संघर्ष और बलिदान की गाथा

"..केन सारो-वीवा के संघर्ष ने नाइज़ीरिया ही नहीं बल्कि तीसरी दुनिया के तमाम देशों में, इन देशों की सत्ताओं के साथ साठ-गाँठ करके बहुराष्ट्रीय कम्पनियों और बड़े-बड़े निगमों की लूट के ख़िलाफ़ एक जुझारू चेतना का निर्माण किया। बेजुबानों की आवाज़ बनने के साथ ही उन्होंने अपने कार्यों से ओगोनी समुदाय के उन लोगों को ताक़त दी जो अल्पसंख्यक होने के नाते अपने को बहुत कमज़ोर समझते थे.."


केन सारो-वीवा के जीवन पर लिखित आनन्द स्वरूप वर्मा की यह किताब बेहद महत्वपूर्ण है। नाइजीरिया की सैनिक हुकूमत ने केन सारो-वीवा को उनके आठ साथियों सहित 10 नवम्बर 1995 को फाँसी पर लटका दिया।

केन सारो-वीवा के संघर्ष ने नाइजीरिया ही नहीं बल्कि तीसरी दुनिया के तमाम देशों में इन देशों की सत्ताओं के साथ साठ-गाँठ करके बहुराष्ट्रीय कम्पनियों और बड़े-बड़े निगमों की लूट के खिलाफ एक जुझारू चेतना का निर्माण किया। बेजुबानों की आवाज बनने के साथ ही उन्होंने अपने कार्यों से ओगोनी समुदाय के उन लोगों को ताकत दी जो अल्पसंख्यक होने के नाते अपने को बहुत कमजोर समझते थे।
केन एक प्रखर लेखक, कवि और पत्रकार थे। टेलीविजन पर उनके कार्यक्रमों को नाइजीरिया में अभूतपूर्व लोकप्रियता मिली थी और वह एक सम्पन्न परिवार से आते थे। सम्वेदनशील होने के नाते उन्होंने समाज के हाशिये पर पड़े लोगों के दर्द को अपना दर्द समझा और उनकी जिन्दगी बेहतर बनाने के लिए अपनी जिन्दगी को दाँव पर लगा दिया।
इस किताब में केन सारो-वीवा के संघर्ष के अनुभवों को दर्ज किया गया है जिससे सत्ता का दमनकारी चरित्र जाहिर होता है। अदालत में दिया गया केन सारो-वीवा का अंतिम बयान भी इसमें संकलित है। उन्होंने नाइजीरिया की परिस्थिति के सन्दर्भ में साहित्य और राजनीति के सम्बन्धों पर भी रोशनी डाली है जो तीसरी दुनिया के देशों के लिए बहुत प्रासंगिक है क्योंकि इन देशों में भी सत्ता और विदेशी पूँजी की दुरभि-संधि से जनता की लूट जारी है।
केन सारो-वीवा का जीवन उन संस्कृतिकर्मियों के लिए खासतौर पर अनुकरणीय है जो सामाजिक बदलाव में लेखन और संस्कृति की भूमिका को समझना चाहते हैं। 
कृति : केन सारो-वीवा (संघर्ष और बलिदान की गाथा)
लेखक : आनन्द स्वरूप वर्मा
प्रकाशन : गार्गी प्रकाशन, दिल्ली
वर्ष : 2019
पृष्ठ : 156
मूल्य : ₹ 100 रुपये
सम्पर्क सूत्र : 9810104481