जगत मर्तोलिया और साथियों की गिरफ्तारी क्यों?

तो कामरेड जगत मर्तोलिया अपने १० साथियों के साथ 
गिरफ्तार हो गए. ये वही जगत मर्तोलिया हैं जो लगातार उत्तराखंड के उन आपदा प्रभावित इलाकों की हकीकत हमें अपने आलेखों के मध्यम से बता रहे थे, जहाँ न कोई मीडिया पहुँच पाया था न ही सरकारी/गैरसरकारी राहत कर्मी. इस बीच एक आरटीआई के जरिये पता चला था कि उत्तराखंड सरकार ने आपदा के बाद राहत बाँटने के बजाय तकरीबन समूचे मीडिया को अपने विज्ञापनों की बाढ़ से डिगा डाला था. ऐसे में कुछ एक ही मीडियाकर्मी और राजनीतिक कार्यकर्ता जमीनी स्तर पर कार्य कर लगातार सरकारी राहत कार्य की पोल खोल रहे थे. जगत मर्तोलिया भी धारचूला के प्रभावित इलाकों में चल रही अनियमितताओं/अनदेखी पर लगातार लोगों को गोलबंद कर धरने दे रहे थे साथ ही इस पर लगातार आलेख भी लिख रहे थे. जिन्हें हमने praxis में लगातार प्रकाशित किया. (इन आलेखों को यहाँ क्लिक करके पढ़ा जा सकता है). २१ अक्टूबर को मुख्यमंत्री की धारचूला यात्रा में भी उनकी आपदा प्रभावितों के साथ मुख्यमंत्री से मिलने की उनकी योजना थी. लेकिन पुलिस ने उन्हें पहले ही गिरफ्तार कर लिया. हम praxis की ओर से अपने इस सहयोगी की गिरफ्तारी के लिए उत्तराखंड सरकार की भर्त्सना करते हैं और उनकी तत्काल रिहाई की मांग करते हैं...
यहाँ भाकपा माले के गढ़वाल सचिव इन्द्रेश मैखुरी ने इस संबंध में एक पत्र उत्तराखंड के मुख्यमंत्री को भेजा है. उसकी प्रति यहाँ प्रकाशित की जा रही है....
-सं. 

श्रीमान मुख्यमंत्री महोदय,  
उत्तराखंड शासन,  
देहरादून. महोदय, 
      कल दिनांक 21 अक्टूबर 2013 को आपके द्वारा आपदा प्रभावित क्षेत्र धारचुला का दौरा किया गया.लेकिन यह बेहद अफसोसजनक है कि आपदा प्रभावितों की मांगों को लेकर आपके समक्ष अपनी बात रखना चाह रहे भाकपा(माले) के पिथौरागढ़ जिला सचिव कामरेड जगत मर्तोलिया को प्रशासन द्वारा आपके धारचुला पहुँचने से पहले ही गिरफ्तार कर लिया गया और आपके वहाँ से लौट आने के बावजूद भी उनकी रिहाई नहीं हुई है.
महोदय,लोकतंत्र में अपनी बात कहने का हक़ सबको है. कामरेड जगत मर्तोलिया तो वो व्यक्ति हैं जो धारचुला के आपदा प्रभावित क्षेत्रों में राहत सामग्री लेकर तब पहुंचे जबकि शासन-प्रशासन तक, आपदा से तबाह हुए लोगों के सुध नहीं ले सका था. आपदा के बाद से पिथौरागढ़ में आपदा पीड़ितों के लिए राहत सामग्री जुटाने से लेकर उनकी दिक्कतों को प्रशासन के सामने लाने तक के लिए वे रात-दिन एक किये हुए थे. ऐसे व्यक्ति को क्या महज इसलिए गिरफ्तार कर लिया जाना चाहिए कि वह एक भिन्न राजनीतिक विचारधारा से सम्बन्ध रखता है? महोदय,यदि पिथौरागढ़ के जिला प्रशासन के इस तर्क को मान भी लिया जाए कि कामरेड जगत मर्तोलिया के नेतृत्व में लोग आपके समक्ष आक्रोश प्रकट कर सकते थे, इसलिए उन्हें गिरफ्तार किया गया, तब भी यह तो आप स्वीकार करेंगे कि जो अभागे लोग प्राकृतिक आपदा में अपना सब कुछ गँवा चुके हैं, उनसे फूल-मालाओं और स्वागत में प्रशस्ति गान की अपेक्षा तो आपको भी नहीं रही होगी! महोदय,यदि आपका दौरा आपदा प्रभावित क्षेत्रों की जमीनी हकीकत जानने के लिए था तो क्या आपदा पीड़ितों का आक्रोश उस हकीकत का प्रकटीकरण नहीं होता? और राज्य का मुखिया होने के नाते क्या ऐसे किसी भी आक्रोश का शमन करने की आपसे अपेक्षा करना क्या गैर कानूनी या विधि विरोधी या आपके सम्मान को ठेस पहुंचाने जैसा आपराधिक कृत्य माना जाएगा?
महोदय,एक तरफ आपकी सरकार विभिन्न संचार माध्यमों के जरिये आपदा पीड़ितों के लिए विभिन्न उपाय करने का दावा कर रही है और दूसरी तरफ आपदा पीड़ितों के सवाल उठाने वाले राजनीतिक कार्यकर्ताओं को आपकी पुलिस और प्रशासन सिर्फ इसलिए गिरफ्तार कर ले रहा है कि कहीं वे आपके समक्ष जमीनी हकीकत ना बयान कर दें.महोदय,तब प्रश्न यह खडा होता है कि ऐसे में असली तस्वीर क्या है-विज्ञापनों के जरिये की जा रही सरकारी घोषणाओं या फिर कामरेड जगत मर्तोलिया जैसे संघर्षशील और आपदा प्रभावितों के सवालों को मुखर हो कर उठाने वालों की गिरफ्तारी?
महोदय,धारचुला दौरे से पूर्व 21 अक्टूबर 2013 के समाचार पत्रों में ही आपका महिलाओं,मजदूरों और गरीबों पर दर्ज किये मुक़दमे वापस लेने का वक्तव्य प्रकाशित हुआ है और दूसरी तरफ आपदा पीड़ितों की बात आप तक पहुंचाने की कोशिश कर रहे कामरेड जगत मर्तोलिया को आपका उक्त वक्तव्य प्रकाशित होने के दिन ही गिरफ्तार कर लिया गया,यह कैसा विरोधाभास है?
महोदय,उक्त तमाम बातों के आलोक में आपसे यह मांग है कि कामरेड जगत मर्तोलिया को अविलम्ब रिहा किया जाए,उन्हें आपदा पीड़ितों की समस्याएं आपके समक्ष रखने से रोक कर उनके संविधान प्रदत्त मौलिक अधिकार का हनन करने वाले पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों के खिलाफ कठोर कार्यवाही की जाए.साथ ही यह भी सुनश्चित करवाने की कृपा करें कि भविष्य में किसी को भी मात्र इसलिए अपनी बात कहने से ना रोक जाए कि वह राजनीतिक रूप से भिन्न मत रखता है.                       सधन्यवाद,
सहयोगाकांक्षी,
इन्द्रेश मैखुरी,
गढ़वाल सचिव,
भाकपा(माले)