सचिन के सन्यास की गुत्थी

नन्दलाल शर्मा

-नन्दलाल शर्मा

ये तय हो चुका है। लेकिन अहम सवाल है यह तय किसने कियाक्या ये फैसला खुद सचिन का हैया फिर उनके कॅरियर पर फुलस्टॉप लगाने की मर्जी बीसीसीआई और मुख्य चयनकर्ता संदीप पाटिल की है। सचिन के चाहने वालों की बड़ी ख्वाहिश उन्हें कुछ साल और खेलते हुए देखने की थी। 

90 के दशक से भारतीय क्रिकेट को अपने कंधों पर ढोने वाले क्रिकेट सितारों का युग अपना वृत्त पूरा करने की ओर है। इस साल नवम्बर में भारतीय टीम जब वेस्टइंडीज के खिलाफ टेस्ट सीरीज खेलने उतरेगी, तो किक्रेट के भगवान सचिन तेंदुलकर 22 गज की पट्टी से आखिरी बार पैवेलियन लौटेंगे।


ये तय हो चुका है। लेकिन अहम सवाल है यह तय किसने किया? क्या ये फैसला खुद सचिन का है? या फिर उनके कॅरियर पर फुलस्टॉप लगाने की मर्जी बीसीसीआई और मुख्य चयनकर्ता संदीप पाटिल की है। सचिन के चाहने वालों की बड़ी ख्वाहिश उन्हें कुछ साल और खेलते हुए देखने की थी। 

जानकारों के अनुसार सचिन के संन्यास लेने के फैसले की समीक्षा करें तो यह हमेशा बीसीसीआई की तरफ से आया है। चाहे वह वनडे का हो या फिर टेस्ट, बोर्ड की ओर से एक प्रेस रिलीज आती है और सारी दुनिया को सचिन के फैसले का पता चलता है। 

सवाल ये है कि ऎसा सचिन के साथ ही क्यों होता रहा? टीम इंडिया की वॉल राहुल द्रविड़, पूर्व कप्तान सौरव गांगुली और देश के लिए सबसे अधिक विकेट लेने वाले अनिल कुंबले के संन्यास की घोषणाओं को याद कर लीजिए। सबके लिए बकायदा भव्य तरीके से प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित कर घोषणा की गई। लेकिन सचिन के लिए प्रेस रिलीज क्यों
क्या बीसीसीआई का दबाव हैहाल के दिनों में हुई घटनाएं बताती है कि इस फैसले के पीछे सिर्फ सचिन की रजामंदी नहीं बल्कि बीसीसीआई और पाटिल का दबाव है। हफ्ते भर पहले मीडिया में ये खबरें आई थी कि सचिन 200वें मैच के बाद टेस्ट क्रिकेट को अलविदा कह देंगे। प्रशंसकों और सीनियर किक्रेटरों ने बीसीसीआई के इस फैसले की जमकर आलोचना की। इसके बाद बोर्ड को यह सफाई देनी पड़ी कि उसने सचिन को संन्यास का फैसला लेने के लिए मजबूर नहीं किया।

इस गुत्थी को समझने के लिए थोड़ा पीछे चलते है। सितंबर के मध्य में मुख्य चयनकर्ता संदीप पाटिल ने सचिन से मुलाकात की। मुलाकात का उद्देश्य सचिन से टीम में उनकी जगह को लेकर बात करना था। पाटिल ने सचिन से साफ साफ कह दिया कि 200वें टेस्ट के बाद टीम में उनका सलेक्शन सिर्फ प्रदर्शन पर निर्भर होगा ना कि पिछले रिकॉर्डो पर। यह उन्हें समझ लेना चाहिए। भारतीय किक्रेट की हलचलों पर बारीक नजर रखने वाले यह जानते हैं कि आगामी वेस्टइंडीज शृंखला तय होने के बाद पाटिल ने श्रीनिवासन को इस बारे में स्पष्ट कर दिया था। 

दागदार श्रीनिवासन से रिश्तों में आई खटास

किसी भी खेल के सबसे बड़े ब्रैंड एंबेंसडर खिलाड़ी ही होते है। आईपीएल 6 के दौरान स्पॉट फिक्सिंग की घटनाएं भारतीय किक्रेट की छवि पर एक दाग है। भले ही सचिन समेत किसी भी बड़े खिलाड़ी ने श्रीनिवासन के खिलाफ जुबान ना खोली हो। लेकिन आईपीएल 6 के दौरान ही श्रीनिवासन को लेकर सचिन में मन में व्याप्त तल्खी देखी जा सकती थी। आईपीएल 6 के फाइनल मुकाबले में ट्रॉफी सेरेमनी के दौरान जब श्रीनिवासन मुंबई के कप्तान और बाकी खिलाडियों के साथ थे, सचिन पीछे खड़े थे। बाद में हरभजन और रोहित शर्मा उन्हें आगे लेकर आए तब तक श्रीनिवासन ट्रॉफी छोड़ साइड ले निकल चुके थे। क्या सचिन से जुड़े फैसलों की कडियों का एक सिरा यहां तो नहीं जुड़ता?

संन्यास की अटकलों से बिगड़ा प्रदर्शन

हालिया दिनों में सचिन तेंदुलकर का प्रदर्शन अपेक्षानुरूप नहीं रहा। आखिरी 12 टेस्टों में उन्होंने केवल 2 अर्धशतक बनाए थे। आखिरी शतक उन्होंने केपटाउन में जनवरी 2011 में लगाया था। इन सभी पहलुओं के बारे में सचिन को अवगत कराया गया। पाटिल की योजना अगले वर्षो में ज्यादा से ज्यादा युवाओं को टीम में मौका देना है। 

वनडे संन्यास के पीछे भी पाटिल


गौरतलब है कि बीते दिसंबर में जब सचिन ने वनडे किक्रेट से संन्यास से घोषणा की। इस फैसले के पीछे भी पाटिल का हाथ था। पाकिस्तान के लिए टीम चुनने से पहले पाटिल ने सचिन से कह दिया था वनडे क्रिकेट टीम में उनके सेलेक्शन की गारंटी नहीं दी जा सकती। क्योंकि चयन समिति विश्व कप 2015 को ध्यान में रखकर टीम तैयार करने के मूड में है। इन सारी गतिविधियों के बाद अगले ही दिन सचिन ने वनडे क्रिकेट से संन्यास का एलान कर दिया।

नंदलाल पत्रकार हैं.क्रिकेट को करीब से देखते हैं.
फिलहाल जयपुर में एक हिंदी दैनिक में काम.
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