मशहूर दलित चिंतक कँवल भारती की गिरफ्तारी की निंदा

"आरक्षण और दुर्गाशक्ति नागपाल इन दोनों ही मुद्दों पर अखिलेश यादव की समाजवादी सरकार पूरी तरह फेल हो गयी है. अखिलेश, शिवपाल यादव, आज़म खां और मुलायम सिंह (यू.पी. के ये चारों मुख्य मंत्री) इन मुद्दों पर अपनी या अपनी सरकार की पीठ कितनी ही ठोक लें, लेकिन जो हकीकत ये देख नहीं पा रहे हैं, (क्योंकि जनता से पूरी तरह कट गये हैं) वह यह है कि जनता में इनकी थू-थू हो रही है, और लोकतंत्र के लिए जनता इन्हें नाकारा समझ रही है. अपराधियों के हौसले बुलंद हैं और बेलगाम मंत्री इंसान से हैवान बन गये हैं. ये अपने पतन की पट कथा खुद लिख रहे हैं. सत्ता के मद में अंधे हो गये इन लोगों को समझाने का मतलब है भैस के आगे बीन बजाना."  
-कँवल भारती  
लित विमर्श के सक्रीय लेखक कँवल भारती को उनके उपरोक्त बयान के लिए अखिलेश सरकार ने गिरफ्तार कर लिया. बहरहाल उनकी जमानत हो गई है. लेकिन लेखक समुदाय और अन्य सरोकारी जनों की ओर से उत्तर प्रदेश की 'समाजवादी' पार्टी सरकार की इस फासीवादी हरकत पर निंदा की गई है. पत्रकार Praxis भी अभिव्यक्ति के इस दमन की भर्त्सना करता है.

लेखकों और संस्कृतिकर्मियों के संगठन 'जन संस्कृति मंच' की ओर से भी इस गिरफ्तारी की निंदा करते हुए प्रेस विज्ञप्ति जारी की है. हम इसे साझा कर रहे हैं.
-संपादक


मशहूर दलित चिंतक कंवल भारती की गिरफ्तारी की निंदा

अखिलेश सरकार इस कृत्य के लिए माफी मांगे और कंवल भारती को आरोपमुक्त करे: जसम

नई दिल्ली: 6 अगस्त 2013
शहूर दलित चिंतक कंवल भारती की फेसबुक पर की गई एक टिप्पणी के संदर्भ में रामपुर (उत्तर प्रदेश) में यूपी पुलिस द्वारा की गई गिरफ्तारी बेहद निंदनीय है। यह लेखक की अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का हनन है। कंवल भारती ने आरक्षण और दुर्गा नागपाल के मुद्दे को लेकर फेसबुक पर जो टिप्पणी की है, वह लोकतंत्र और सामाजिक समानता के प्रति प्रतिबद्ध एक जिम्मेवार लेखक की चिंता और बेचैनी को ही जाहिर करती है। सरकार और मंत्रियों के नकारेपन और उनके द्वारा अपराधियों की सरपरस्ती के खिलाफ किसी भी लोकतंत्रपसंद व्यक्ति का गुस्सा वाजिब है। न्यायालय से जरूर कंवल भारती को जमानत मिल गई है, पर हमारी मांग है कि अखिलेश सरकार इस कृत्य के लिए माफी मांगे और कंवल भारती को आरोपमुक्त करे। हमारी यह भी मांग है कि उत्तर प्रदेश में माफियाओं और अपराधियों की लूट के तंत्र को कायम रखने के लिए जिस तरह सांप्रदायिक-जातिवादी भावनाएं भडकाने की कोशिशें सरकारी मंत्री कर रहे हैं, उन पर अविलंब रोक लगाई जाए।  
सुधीर सुमन, राष्ट्रीय सहसचिव, जन संस्कृति मंच द्वारा जारी
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