गंगनम, मोमो और पनीर-मोमो!

विधांशु कुमार

-विधांशु कुमार

'गंगनम' कहने लगा तुम दिल्ली वाले भी हर चीज़ में पनीर डाल देते हो- पनीर-परांठा तो समझ में आता है - ये पनीर-डोसा, पनीर-बिरयानी, पनीर-अप्पम क्या चीज़ है? पनीर का नाम सुनकर मेरे मुंह में पानी आ गया लेकिन जिस तरह उसने पनीर को स्वछंद गाली दी थी, दिल्ली के कई सौ क्विंटल पनीर पानी-पानी हो गए होंगे.



पिछली बार जब ''गंगनम' ' मुझसे मिला तो वो बहुत गुस्से में था.

ये यूट्यूब ख्याति वाला 'गंगनम' नहीं, बल्कि मेरा एक दोस्त है. 'गंगनम' का असली नाम कुछ और है लेकिन क्योंकि वो पूर्वोत्तर भारत से है और हम शेष भारत में वहां के बाशिंदों को तरह तरह के नाम से बुलाते हैं, उसका नाम भी ''गंगनम' ' रख दिया गया है.
वैसे तो कभी चीन अपने नक्शे में अरुणाचल प्रदेश या पूर्वोत्तर भारत के किसी दूसरे हिस्से को दिखा दे, या फिर वहां अलग देश की मांग हो तो हमारे जैसे देशभक्त भारतीयों का खून खौल उठता है. लेकिन हम वहां के लोगों को खुद से कुछ कम समझते हैं और तिरछी आंखों वाले और कुछ बेहद भद्दे नामों से पुकारने में कोई हिचक नहीं रखते हैं, ये हमारा 'बड़प्पन' है.

'गंगनम' को भी इन चीज़ों से ऐतराज़ है लेकिन इस बार उसका गुस्सा किसी और वजह से था.

दरअसल बीती रात वो दफ्तर से लंबी शिफ्ट के बाद घर के लिए निकला तो उसे बड़ी भूख लगी थी. चौराहे पर उसे ठिठुरती सर्दी में खड़ा एक लड़का मिला जो मोमो बेच रहा था. उसने एक प्लेट ऑर्डर दिया लेकिन जब उसने पहला ही मोमो मुंह में डाला तो, बकौल उसके, "पूरा स्वाद किरकिरा हो गया. ये कोई मटन या चिकन मोमो नहीं पनीर मोमो था. छी:"

उसने बताया, "मैंने उससे पूछा ये क्या डाल रखा है तो उसने जवाब दिया, बंदर क्या जाने अदरक का स्वाद. अब बताओ उसने एक तो ऐसी चीज़ खिलाई जो कहीं से मोमो से मेल नहीं खाती और दूसरा मुझे बंदर कह दिया."

मैनें पानी का ठंडा गिलास उसे बढ़ाते हुए कहा कि वो लड़का पढ़ा लिखा था, एक मुहावरा कह रहा था ओर तुम्हें बंदर नहीं कहा उसने.

इस पर 'गंगनम' और भड़क उठा. वैसे यहां ये भी बता दूं कि मैं उसे उसके नाम से पुकारना पसंद करता हूं और 'गंगनम' कतई नहीं कहता. लेकिन यहां उसे 'गंगनम' कहना ज़रूरी है क्योंकि उस रात उसने कुछ ऐसी बात कह दी की अगर उसकी पहचान मालूम हो जाए तो वो कई नर्म श्रद्धालुओं के गर्म गुस्से के हत्थे चढ़ जाए.

'गंगनम' कहने लगा तुम दिल्ली वाले भी हर चीज़ में पनीर डाल देते हो- पनीर परांठा तो समझ में आता है - ये पनीर दोसा, पनीर बिरयानी, पनीर अप्पम क्या चीज़ है?

पनीर का नाम सुनकर मेरे मुंह में पानी आ गया लेकिन जिस तरह उसने पनीर को स्वछंद गाली दी थी, दिल्ली के कई सौ क्विंटल पनीर पानी-पानी हो गए होंगे.

मैने पनीर के डिफेंस में कहा , "अरे देवों का आहार है पनीर. जैरी माउज़ से लेकर लिटिल प्रिंस तक, कश्मीर से कन्याकुमारी तक बच्चे बूढ़ों की पसंद है पनीर. फिर ये भी तो देखों कितना प्रोटीन मिलता है इससे वो भी बिना हिंसा किए हुए."

मु्झे अपनी ही दलील पर गर्व महसूस हो रहा था कि मैने 'गंगनम' से बाज़ी मार ली कि उसने एक और शिगूफ़ा छोड़ा.

कहने लगा, "अरे देवों की बात तो तुम छोड़ ही दो. वहां शिलॉन्ग में मैं भी कभी कभी हनुमान जी के मंदिर में जाता था. लेकिन अब तो हर जगह साईं बाबा के मंदिर नज़र आते हैं. वैसे भारत में मोमो ने समोसे को और साईं बाबा ने हनुमान जी को पीछे छोड़ दिया है."

उसकी आखिरी लाइन सुनकर मैं सकते में आ गया. मैनें कहा तुम 'गंगनम' ही ठीक हो. छुपे रहना, कहीं वायरल हो गए तो पता नहीं क्या क्या बदल डालोगे और अगर पकड़ में आ गए तो लोग ही तुम्हें बदल डालेंगे.
मैनें इधर उधर देखा, किसी ने सुना तो नहीं, फिर हाथ पकडकर उसे सीढ़ियों से नीचे ले गया.

घर से थोड़ी दूरी पर साईं बाबा के मंदिर के पास मैंने उसे रिक्शे पर बिठाया, बाबा के दरबार में सर नवाकर दुआ मांगी और फिर लपककर सड़क की दूसरी तरफ एक ठेले की तरफ बढ़ा और बीस का एक नोट बढ़ाते हुए कहा, "एक प्लेट पनीर मोमोज़ देना, लाल चटनी के साथ!"पिछली बार जब ''गंगनम' ' मुझसे मिला तो वो बहुत गुस्से में था.

ये यूट्यूब ख्याति वाला 'गंगनम' नहीं, बल्कि मेरा एक दोस्त है. 'गंगनम' का असली नाम कुछ और है लेकिन क्योंकि वो पूर्वोत्तर भारत से है और हम शेष भारत में वहां के बाशिंदों को तरह तरह के नाम से बुलाते हैं, उसका नाम भी ''गंगनम' ' रख दिया गया है.

वैसे तो कभी चीन अपने नक्शे में अरुणाचल प्रदेश या पूर्वोत्तर भारत के किसी दूसरे हिस्से को दिखा दे, या फिर वहां अलग देश की मांग हो तो हमारे जैसे देशभक्त भारतीयों का खून खौल उठता है. लेकिन हम वहां के लोगों को खुद से कुछ कम समझते हैं और तिरछी आंखों वाले और कुछ बेहद भद्दे नामों से पुकारने में कोई हिचक नहीं रखते हैं, ये हमारा 'बड़प्पन' है.

'गंगनम' को भी इन चीज़ों से ऐतराज़ है लेकिन इस बार उसका गुस्सा किसी और वजह से था.

दरअसल बीती रात वो दफ्तर से लंबी शिफ्ट के बाद घर के लिए निकला तो उसे बड़ी भूख लगी थी. चौराहे पर उसे ठिठुरती सर्दी में खड़ा एक लड़का मिला जो मोमो बेच रहा था. उसने एक प्लेट ऑर्डर दिया लेकिन जब उसने पहला ही मोमो मुंह में डाला तो, बकौल उसके, "पूरा स्वाद किरकिरा हो गया. ये कोई मटन या चिकन मोमो नहीं पनीर मोमो था. छी:"

उसने बताया, "मैंने उससे पूछा ये क्या डाल रखा है तो उसने जवाब दिया, बंदर क्या जाने अदरक का स्वाद. अब बताओ उसने एक तो ऐसी चीज़ खिलाई जो कहीं से मोमो से मेल नहीं खाती और दूसरा मुझे बंदर कह दिया."

मैनें पानी का ठंडा गिलास उसे बढ़ाते हुए कहा कि वो लड़का पढ़ा लिखा था, एक मुहावरा कह रहा था ओर तुम्हें बंदर नहीं कहा उसने.

इस पर 'गंगनम' और भड़क उठा. वैसे यहां ये भी बता दूं कि मैं उसे उसके नाम से पुकारना पसंद करता हूं और 'गंगनम' कतई नहीं कहता. लेकिन यहां उसे 'गंगनम' कहना ज़रूरी है क्योंकि उस रात उसने कुछ ऐसी बात कह दी की अगर उसकी पहचान मालूम हो जाए तो वो कई नर्म श्रद्धालुओं के गर्म गुस्से के हत्थे चढ़ जाए.

'गंगनम' कहने लगा तुम दिल्ली वाले भी हर चीज़ में पनीर डाल देते हो- पनीर परांठा तो समझ में आता है - ये पनीर दोसा, पनीर बिरयानी, पनीर अप्पम क्या चीज़ है?

पनीर का नाम सुनकर मेरे मुंह में पानी आ गया लेकिन जिस तरह उसने पनीर को स्वछंद गाली दी थी, दिल्ली के कई सौ क्विंटल पनीर पानी-पानी हो गए होंगे.

मैने पनीर के डिफेंस में कहा , "अरे देवों का आहार है पनीर. जैरी माउज़ से लेकर लिटिल प्रिंस तक, कश्मीर से कन्याकुमारी तक बच्चे बूढ़ों की पसंद है पनीर. फिर ये भी तो देखों कितना प्रोटीन मिलता है इससे वो भी बिना हिंसा किए हुए."

मु्झे अपनी ही दलील पर गर्व महसूस हो रहा था कि मैने 'गंगनम' से बाज़ी मार ली कि उसने एक और शिगूफ़ा छोड़ा.

कहने लगा, "अरे देवों की बात तो तुम छोड़ ही दो. वहां शिलॉन्ग में मैं भी कभी कभी हनुमान जी के मंदिर में जाता था. लेकिन अब तो हर जगह साईं बाबा के मंदिर नज़र आते हैं. वैसे भारत में मोमो ने समोसे को और साईं बाबा ने हनुमान जी को पीछे छोड़ दिया है."

उसकी आखिरी लाइन सुनकर मैं सकते में आ गया. मैनें कहा तुम 'गंगनम' ही ठीक हो. छुपे रहना, कहीं वायरल हो गए तो पता नहीं क्या क्या बदल डालोगे और अगर पकड़ में आ गए तो लोग ही तुम्हें बदल डालेंगे.
मैनें इधर उधर देखा, किसी ने सुना तो नहीं, फिर हाथ पकडकर उसे सीढ़ियों से नीचे ले गया.

घर से थोड़ी दूरी पर साईं बाबा के मंदिर के पास मैंने उसे रिक्शे पर बिठाया, बाबा के दरबार में सर नवाकर दुआ मांगी और फिर लपककर सड़क की दूसरी तरफ एक ठेले की तरफ बढ़ा और बीस का एक नोट बढ़ाते हुए कहा, "एक प्लेट पनीर मोमोज़ देना, लाल चटनी के साथ!"

(यह पोस्ट बीबीसी हिंदी ब्लॉग से साभार)
विधांशु पत्रकार हैं. अभी बीबीसी से जुड़े हैं. 
इनसे संपर्क का पता vidhanshu.kumar@bbc.co.uk 
और vidhanshu.kumar@gmail.com है.