'गीता' नाम की जिंदा 'दामिनी' का पत्र


यह एक पत्र है. एक महिला का पत्र. ये अपनी आप-बीती उन लोगों को बताना चाहती है जो दिल्ली में हुए जघन्य बलात्कार और देह विदारण की घटना पर अपना भरपूर आक्रोश दिखा चुके हैं. यह महिला बस वह महिला होते-होते बच गई है जिसका दिल्ली में बलात्कार हुआ और फिर 'हत्या'. जो महिला बलात्कार का शिकार हो गई उसके समर्थन में तो हम लोगों का हुजूम उसे न्याय दिलाने निकल पड़ा था. लेकिन एक रसूखदार शख्स से 'बलात्कृत' होने से बाल-बाल बच गई इस महिला को भी न्याय की दरकार है... और न्याय के धंधे से जुड़ा शख्स ही इसका अपराधी है... क्या हम इस महिला की भी सुनेंगे? आइये इसे सीरियसली लें....                          
 -मॉडरेटर
(यहाँ यह पत्र रामनगर(उत्तराखंड) से प्रकाशित पाक्षिक 'नागरिक'से साभार लिया जा रहा है.)

मैं गीता, रामनगर की रहने वाली 23 वर्षीय महिला हूं। मेरा विवाह 5 वर्ष पूर्व हुआ। मेरे पति का किसी और से सम्बंध होने के चलते मैंने उससे अपना सम्बंध खत्म करने के लिए रामनगर न्यायपालिका में वाद दाखिल किया है। चार वर्ष से मेरा मुकदमा न्यायालय में विचाराधीन है। इस दौरान मैंने दो वकील बदले। पहले वकील ने भी मुझे असहाय समझ मुझसे फायदा उठाने की सोची तो मैंने अपना वकील बदल दिया। दूसरी बार मैंने रामनगर बार ऐसोसिएशन के अधिवक्ता 'सुरेश चंद्र गुप्ता' को अपनी पैरवी करने के लिए नियुक्त किया। इस वकील के पास मेरा केस दो माह के लिये रहा। मैं एक गरीब घर की लड़की हूं। मेरे पिता मेहनत मजदूरी करते हैं। मुझसे छोटे मेरे चार भाई-बहन और हैं। कुछ दिन बीत जाने के बाद में वकील मुझे फोन व मैसेज भेजकर इधर-उधर घूमने चलने के लिए कहने लगा। मैंने उसके फोन रिसीव करने बंद कर दिये और कहा कि जब कोर्ट में तारीख के समय मैं आती ही हूं तो फिर फोन पर लंबी बातचीत करने का क्या मतलब बनता है। फिर इसने मुझे 8-10 पेज के लम्बे-लम्बे प्रेम पत्र लिखने शुरू कर दिये। जिसके लिए भी मैंने बहुत मना किया। मैंने यहां तक कहा कि मैं आपकी बेटी की उम्र की लड़की हूं और आपको मुझे इस तरह के पत्र नहीं लिखने चाहिए। फिर मैंने उनकी पत्नी जो कि रामनगर के ही जी.पी.पी स्कूल में अध्यापिका हैं, से इनकी शिकायत की तो उसने भी मुझे ही बुरा भला कहा। कोर्ट के बाहर एक दिन वकील ने एक राइस मिल वाले की सफेद रंग की गाड़ी में मुझे जबरदस्ती बैठाने की कोशिश की मेरे इंकार करने पर वकील मेरा पर्स खींचकर मुझे गाड़ी में बैठाने लगा।किसी तरह मैं पर्स छुड़ाकर वापस आयी।मैने वकील  व अन्य दो कर्मचारी जो कि वकील से मेरा मो. नं. लेकर मुझे परेशान करते थे, इन सभी की शिकायत जज साहब से की। जज साहब ने कर्मचारियों की ही शिकायत सुनी।
अधिवक्ता सुरेश चंद्र गुप्ता बार-बार मुझसे अकेले में मिलने या किसी रिजोर्ट में चलने की बात करता। केस के बहाने अश्लील बातें मुझसे पूछता। मुझे अश्लीलता भरे पत्र लिखता। अगर मैं फोन रिसीव नहीं करती तो टेम्पू करके मेरे घर पहुंच जाता और मेरे पिता से कहता कि आपकी बेटी तो मुझसे बात करना ही पसंद नहीं करती, ऐसे में आप जिन्दगी भर कोर्ट के चक्कर लगाते रह जाओगे। वकील की बात पर ऐतबार करके मेरे पिता मुझे ही बुरा-भला कहते और मारते-पीटते।
अंततः बहुत तंग आकर मैंने इस वकील को भी बदलना मुनासिब समझा और जून 2012 से मैंने अपना वकील बदल दिया परंतु यह मुझे आज तक परेशान कर रहा है। मैं एक प्राइवेट अस्पताल में कार्य करती थी। वहां पर भी वह मेरे नाम से पत्र छोड़ जाता और बराबर फोन पर मुझ पर गलत सम्बंध बनाने, होटल में चलने का दबाव बनाता रहा है। 1 दिसम्बर 2012 को तो हद ही हो गयी जब मैं एक अस्पताल में अपनी आंखों के इलाज हेतु गयी थी वहां पर आकर इसने मेरा हाथ पकड़ कर ले जाने की कोशिश की और बोला,मेरे साथ चल। मैं किसी तरह हाथ छुड़ाकर वहां से बगैर आंख दिखाये भाग कर आई। वकील अब मुझे सरेआम परेशान करने लगा। 
मैंने रामनगर कोतवाली में अपने साथ होने वाली छेड़छाड़ के खिलाफ वकील सुरेश चंद्र गुप्ता के नाम से तहरीर दी।आखिर में मैंने प्रगतिशील महिला एकता केंद्र व महिला समाख्या की महिलाओं से सम्पर्क किया और अपनी  समस्या बताई। 3 दिन बीतने के बाद भी रामनगर पुलिस ने वकील को गिरफ्तार नहीं किया और जांच नहीं की। तब महिला संगठनों के साथ मैं कोतवाली पुनः गई और जांच प्रक्रिया के बारे में पूछताछ की।
इधर शहर में जाने-माने लोगों द्वारा मेरे ऊपर समझौता कर लेने का दबाव निरंतर बनाया जा रहा है। पुलिस ने अभी तक वकील को गिरफ्तार नहीं किया है। उधर वकील ने कोर्ट में सरंडर कर अपनी गिरफ्तारी से पहले ही जमानत मंजूर करा ली है और वह मेरे जानने वालों व समाज में मुझे चरित्रहीन कहकर सम्बोधित कर रहा है। मैं कहती हूं कि चरित्रहीन वह वकील है जो अपनी बेटी की उम्र की लड़की पर गंदी नजर रखता है। वह एक ऐसा मानसिक रूप से विकृत वकील है जिसे समाज में न्याय दिलवाने का कार्य नहीं दिया जाना चाहिए। नैतिकता के आधार पर उससे उसकी वकालत की डिग्री छीन ली जानी चाहिए ताकि वह मुझ जैसी बेसहारा गरीब लड़कियों का आगे कभी फायदा न उठा सके। न्यायपालिकाओं में तो मेरे जैसी अनेक मजबूर लड़कियां अपने साथ हुये अन्याय के खिलाफ न्याय की आस में आती हैं पर यहां पर इस तरह के चरित्रहीन वकील उनका फायदा उठाना चाहते हैं। इसके अलावा इस वकील को मेरे साथ छेड़छाड़ करने के अपराध में सजा भी मिलनी चाहिए। चूंकि इस वकील के द्वारा मुझे लगातार उठवाने व समझौता करने का दबाव बनाया जा रहा है इसलिए मैंने रामनगर में प्रेस कांफ्रेस करने से लेकर महिला आयोग, एसडीएम रामनगर व बार एसोसियेशन रामनगर को भी पत्र लिखा है। मेरी मदद हेतु प्रगतिशील महिला एकता केंद्र ने निष्पक्ष जांच कराने व अपराधी को सजा दिलाने के लिए एसएसपी नैनीताल से भी गुहार लगाई है और मैं आगे भी न्याय के लिए अपनी ओर से सम्भव कार्यवाही करती रहूंगी।

-गीता, रामनगर


*एक स्पष्टीकरण- 
हमें यह नहीं मालूम कि दामिनी उस पीड़ित युवती का असल नाम है या नहीं. लेकिन जैसा कि फेसबुक या अन्य सोशल नेटवर्किंग साइट्स में प्रचलित हुआ था, हम इस पोस्ट के शीर्षक में उसी नाम का प्रयोग कर रहे हैं. हम मीडिया के ज़िम्मेदार होने के बेहद पक्षधर हैं. और समकालीन मीडिया एथिक्स के अनुसार बलत्कार पीड़िता के असल नाम का प्रयोग नहीं किया जाना चाहिए. लेकिन यहाँ हम यह सीमा रेखा जानबूझ कर लांघ रहे हैं क्योंकि इस तरह बलात्कार पीड़िता का नाम छुपाया जाना उसे पीड़िता न मानकर 'अपराधी' मानाने जैसा है. और इसके पीछे हमारे समाज की वही दम्भी पुरुषवादी मानसिकता काम करती है. हम ऐसा कर इस पुरुषवादी मानसिकता को चुनौती देना चाहते हैं... -मॉडरेटर