बिहार पुलिस ने अमिताभ बच्चन को बनाया नया हथियार


"...उन्हें लगा कि अमिताभ बच्चन आज भी युवाओं में सबसे ज्यादा लोकप्रिय हैं। लिहाजा उन्होंने सोचा कि यदि इस ट्रेनिंग में भाग लेने की अपील वाले पोस्टर में अमिताभ बच्चन और उनकी इस कविता का प्रयोग किया जाए तो इसके दूरगामी परिणाम निकलेंगे। लिहाजा तत्काल एक बड़ा पोस्टर बनवाया गया। उसमें अमिताभ बच्चन की बड़ी सी तस्वीर डाली गई और साथ में ‘जीवन पथ जटिल है ये, काल चक्र कठिन है ये, पग-पग पर भेदभाव है, रक्त रंजित पांव हैं...’ कविता भी उस पोस्टर पर चस्पा कर दी गई।.."

-कमलेश

सा लगता है कि बिहार पुलिस अपनी बेवकूफियों का विश्व रिकार्ड बनाना चाहती है। अभी दिल्ली में यहां के पुलिस प्रमुख द्वारा वीडियोग्राफी को लेकर दिये गये बयान का मामला ठंडा भी नहीं हुआ था कि उसने माओवादियों के खिलाफ चल रहे अपने अभियान में अमिताभ बच्चन का उपयोग कर अपनी भद्द पिटवा ली। इस बार उसने बिहार में नक्सलवादियों से लड़ने के लिए अमिताभ बच्चन द्वारा पढ़ी जाने वाली उस कविता
को अपना हथियार बनाने की कोशिश की जिसे वे सोनी टीवी पर चलने वाले अपने कार्यक्रम कौन बनेगा करोड़पति में पढ़ते हैं। अमिताभ बच्चन की आपत्ति के बाद बिहार पुलिस को अपनी गलती का अहसास हुआ लेकिन तब तक देश भर में उसकी किरकिरी हो चुकी थी। ज्यादा दिन नहीं हुए जब बरमेश्वर मुखिया की शवयात्रा के दौरान हुए बवाल की वीडियोग्राफी के मामले में पुलिस की किरकिरी हुई थी।

दरअसल यह पूरा मामला नक्सल प्रभावित जिले कैमूर से जुड़ा है। इस जिले में भाकपा माओवादी का जबर्दस्त आधार है। इस जिले में पुलिस से माओवादियों की कई मुठभेड़ भी हो चुकी है। पुलिस की लाख कोशिशों के बावजूद जिले में माओवादियों का आधार लगातार बढ़ रहा है। खासकर युवाओं के बीच उनकी पैठ इधर हाल के दिनों में बहुत तेजी से बढ़ी है। कैमूर की पुलिस को हाल के दिनों में यह दिव्य ज्ञान हुआ कि यदि इन नौजवानों को रोजगार से जोड़ दिया जाए तो इनका माओवादियों से मोह भंग हो जाएगा और वे माओवादी की जगह कैरियरवादी हो जाएंगे। तो अपने इस ज्ञान का प्रयोग कैमूर पुलिस ने माओवाद से सबसे ज्यादा प्रभावित अघौरा प्रखंड में शुरू किया। पुलिस प्रशासन की ओर से यहां के  शिक्षित बेरोजगारों को केंद्र सरकार के इंटीग्रेटेड एक्शन प्लान के तहत रोजगारोन्मुख प्रशिक्षण दिया जाने लगा। उन्हें रोजगार मिले इस उद्देश्य से उन्हें रेलवे और बैंकिंग की परीक्षाओं की तैयारी तो कराई ही जा रही है, सेना, पुलिस, कम्प्यूटर इत्यादि की ट्रेनिंग भी अधौरा के जिला पार्षद के परिसदन में दी जा रही है। दो शिफ्टों में 150-150 युवक प्रशिक्षण ले रहे हैं। अचानक वहां की पुलिस को एक ज्ञान और हुआ। यह ज्ञान शायद उन पुलिस अधिकारियों को सबसे पहले हुआ जो सोनी टीवी पर प्रसारित होने वाले कार्यक्रम कौन बनेगा करोड़पति को नियमित रूप से देखते हैं। इन अधिकारियों ने उस कार्यक्रम में फिल्म अभिनेता अमिताभ बच्चन द्वारा पढ़ी जाने वाली वह कविता भी सुनी- ‘जीवन पथ जटिल है ये, काल चक्र कठिन है ये, पग-पग पर भेदभाव है, रक्त रंजित पांव हैं...।’ इस कविता के बाद उन्हें लगा कि अमिताभ बच्चन आज भी युवाओं में सबसे ज्यादा लोकप्रिय हैं। लिहाजा उन्होंने सोचा कि यदि इस ट्रेनिंग में भाग लेने की अपील वाले पोस्टर में अमिताभ बच्चन और उनकी इस कविता का प्रयोग किया जाए तो इसके दूरगामी परिणाम निकलेंगे। लिहाजा तत्काल एक बड़ा पोस्टर बनवाया गया। उसमें अमिताभ बच्चन की बड़ी सी तस्वीर डाली गई और साथ में ‘जीवन पथ जटिल है ये, काल चक्र कठिन है ये, पग-पग पर भेदभाव है, रक्त रंजीत पांव हैं...’ कविता भी उस पोस्टर पर चस्पा कर दी गई।

बड़े मजे से प्रचार चल रहा था और शायद यह चलता रहता। लेकिन इस बीच किसी खुराफाती ने किसी तरह यह सूचना अमिताभ बच्चन तक पहुंचा दी। अमिताभ बच्चन ने इसे काफी गंभीरता से लिया और तत्काल इस मामले में ट्वीटर और फेसबुक पर आपत्ति दर्ज की। उन्होंने लिखा- ‘बिहार पुलिस ने अपनी फोर्स में युवाओं को भर्ती करने के लिए, ताकि वो नक्सलियों से लड़ सकें, मेरी तस्वीर का इस्तेमाल किया है। यह अवैध, गलत और निंदनीय है। मेरी आज्ञा के बगैर या सोनी टीवी के आज्ञा के बगैर उन्होंने ऐसा किया है। उन्हें तुरंत मेरी तस्वीर का इस्तेमाल बंद कर देना चाहिए। इस मामले को लेकर मैं अपने वकीलों से बात कर रहा हूं।’ (ताज़ा अपडेट है कि अमिताभ ने इस मामले में कानूनी कार्रवाई न करने का फैसला लिया है. इस बात का बिहार पुलिस ने उन्हें धन्यवाद भी दिया है). जैसे ही बिहार पुलिस को अमिताभ बच्चन की इस टिप्पणी के बारे में पता चला, हंगामा मच गया। आनन-फानन में बिहार पुलिस मुख्यालय ने कैमूर पुलिस को इस तरह के पोस्टर और होर्डिंग्स उतारने का आदेश दिया। लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी और इस मामले की चर्चा देश भर में हो चुकी थी। इस मामले में जब बिहार पुलिस के प्रमुख से बात करने की कोशिश की गई तो उन्होंने कुछ भी बोलने से मना कर दिया। वैसे कुछ लोग अब बिहार पुलिस के पक्ष में खड़े हो गये हैं और यह कहकर अमिताभ बच्चन की आलोचना कर रहे हैं कि उन्होंने यह साबित कर दिया कि उन्हें हर काम के लिए पैसे चाहिए। बहरहाल अभी युवाओं की ट्रेनिंग बंद है। इस पर कैमूर पुलिस का कहना है कि फिलहाल पर्व को लेकर ट्रेनिंग ले रहे युवाओं की छुट्टी कर दी गयी है। छठ बाद फिर ट्रेनिंग शुरू होगी।

इस मामले में कैमूर के एसपी उमाशंकर सुधांशु का कहना है कि फिल्म अभिनेता अमिताभ बच्चन की तस्वीर और उनकी कविता वाली होर्डिंग्स ट्रेनिंग प्लेस से हटा दी गई है। उनके अनुसार अगर इससे बच्चन जी आहत हुए हैं तो उन्हें भी दुख है। उन्होंने यह भी कहा कि अमिताभ की फोटो व कविता वाला जो बैनर प्रशिक्षण के दौरान लगा था वह जनहित में था। युवाओं को प्रेरित करने के उद्देश्य से लगाया गया था, ताकि वे समाज की मुख्यधारा में आ सके। उनके अनुसार बैनर लगाकर पुलिस कोई व्यवसाय नहीं कर रही थी।

अमिताभ बच्चन द्वारा पढ़ी गई वह कविता जिसका उपयोग बिहार पुलिस कर रही थी: 

 जीवन पथ जटिल है, कालचक्र कठिन है
 पग-पग पर भेद भाव है, रक्तरंजित पांव है
 जन्म से किसी के सर वंश की छांव है
 झूठ के रथ पर सवार डाकुओं का गांव है
 किसी के पास है छल-कपट, किसी को रूप का वरदान है
 यह सोच के मत बैठ जा कि यह विधि का विधान है
 बज रहा मृदंग है, ये कहता अंग-अंग है
 कि प्राण अभी शेष है, मान अभी शेष है
 उठा ले ज्ञान का धनुष
 एक कण भी और कुछ मांग मत भगवान से
 ज्ञान की कमान पे लगा दे तू विजय तिलक
 काल के कपाल पे, लिख दे तू ये गुलाल से
 कि रोक सकता है कोई तो रोक के दिखा मुझे
 हक छीनता आया है जो अब छीन के बता मुझे
 ज्ञान के मंच पर सब एक समान हैं
 विधि का विधान पलट दे वो ब्रह्मास्त्र ज्ञान है
 तो आज से ये ठान ले, ये बात गांठ बांध ले
 कि कर्म के कुरुक्षेत्र में
 न रूप काम आता है न झूठ काम आता है
 न जाति काम आती है न बाप का नाम काम आता है
 सिर्फ ज्ञान ही आपको आपका हक दिलाता है।



        कमलेश वरिष्ठ पत्रकार हैं.प्रतिरोध और वामपंथी विचारधारा  की उपज.
अभी एक दैनिक अखबार में नौकरी. इनसे  संपर्क का पता kamleshbux@gmail.com है.