काम मंत्रालय में, सैलरी आठ हज़ार


निखिल भूषण

"...यहां पर अगर मानिटर ग्रेड-1 के लिए जब भी नई बहाली की जाती है तो किसी को दस हजार से ज्यादा नहीं दिया जाता है। उसके बाद दस हजार में से टीडीएस के नाम पर दस प्रतिशत यानि एक हजार रुपए, पीएफ के नाम पर आठ प्रतिशत यानि 800 रुपए और ईएसआई के नाम पर दस प्रतिशत यानि दो सौ रुपए काट लिए जाते है। यानि जिनकी सैलरी दस हजार रुपए है उन्हें हाथ में केवल 8 हजार रुपए मिलते है।..."

इलैक्ट्रानिक मीडिया मानीटरिंग सेंटर (ईएमएमसी) की स्थापना 9 जून 2008 को सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय ने टीवी चैनलों पर निगरानी के उद्देश्य से की है। ईएमएमसी  सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय का ही एक विभाग है। लेकिन पिछले सवा चार सालों से यहां काम कर रहे कर्मचारियों की हालत बहुत दयनीय है। ईएमएमसी में नियुक्ति की प्रकिया बेसिल के माध्यम से होती है। यहां पर मानिटर ग्रेड-1, मानिटर ग्रेड-2 और कंटेंट आडिटर (सीए) के  पदों का प्रावधान है। अगर आप बेसिल की साइट पर देखें तो मानिटर ग्रेड-1 के लिए दस हजार से साढ़े चौदह हजार रुपए के बीच, मानिटर ग्रेड-2 के लिए पंद्रह हजार से बीस हजार और सीए के लिए बीस हजार से पच्चीस हजार के बीच सैलरी देने का प्रावधान है। लेकिन जब अनुबंध के तौर पर नई नियुक्ति की जाती है तो सैलरी काफी कम करके दी जाती है। इस वक्त ईएमएमसी में इन तीन पदों पर 150 से ज्यादा कर्मचारी काम कर रहे है। इनमें से मात्र 6 लोग ही सीए पद पर काम करते हैं।

यहां पर अगर मानिटर ग्रेड-1 के लिए जब भी नई बहाली की जाती है तो किसी को दस हजार से ज्यादा नहीं दिया जाता है। उसके बाद दस हजार में से टीडीएस के नाम पर दस प्रतिशत यानि एक हजार रुपए, पीएफ के नाम पर आठ प्रतिशत यानि 800 रुपए और ईएसआई के नाम पर दस प्रतिशत यानि दो सौ रुपए काट लिए जाते है। यानि जिनकी सैलरी दस हजार रुपए है उन्हें हाथ में केवल 8 हजार रुपए मिलते है। किसी भी संस्थान में एक साथ टीडीएस और पीएफ नहीं काटा जाता है वो भी दस हजार की सैलरी में। अगर कोई कर्मचारी बीमार हो जाता है तो छुट्टी ना देकर उसकी सैलरी काट ली जाती है और कर्मचारियों को साल में कोई छुट्टी भी नहीं मिलती है। किसी भी संस्थान में कर्मचारियों को सालाना छुट्टी दी जाती है, लेकिन अगर आप ईएमएमसी में किसी जरुरी कार्य से भी अनुपस्थित रह गए तो आपकी सैलरी कट जाएगी। सरकारी छुट्टी या पर्व वाले दिनों में भी जब कर्मचारी कार्यालय आते है उन्हें उनका अलग से पारिश्रमिक नहीं मिलता है। यहां के कर्मचारियों को ना अब तक पीएफ नंबर दिए गए हैं और ना ही ईएसआई कार्ड दिए गए हैं। जो टीडीएस एक बाद वापस देने का का प्रावधान हैं वो भी कई लोगों को नहीं मिलता है।

ईएमएमसी में जब भी बहाली होती है वो मानिटर ग्रेड-1 के लिए होती है। यहां काम कर रहे लोगों की सैलरी में दो सालों से कोई बढ़ोत्तरी नहीं की गई है। कुछ कर्मचारियों को मानिटर ग्रेड-2 में जरुर पदोन्नत किया गया लेकिन उनकी सैलरी नहीं बढ़ाई गई । पिछले कई महीनों से ईएमएमसी ने कर्मचारियों को झांसा देकर रखा है कि उनकी सैलरी बढ़ा दी जाएगी लेकिन पिछले दो सालों से उन्हें बेवकूफ ही बनाया जा रहा है। जब भी कोई व्यक्ति संस्थान से अपनी हक की मांग करता है, उन्हें तत्काल प्रभाव से बिना कारण बताए सेवा से हटा दिया जाता है। सैलरी आने में भी कई तरह दिक्कतें होती है। कई लोगों को तीन तीन महीने की सैलरी नहीं मिल पाती है।

कहने को यहां के कर्मचारी सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय के अंतर्गत काम रहे है लेकिन उनकी स्थिति दिहाड़ी मजदूर से बुरी है। यहां साढ़े आठ घंटे तक कर्मचारियों को डेस्कटाप लगातार टीवी देखने का काम करना होता है, इसी कारण कई कर्मचारियों के स्वास्थ्य पर बुरा असर भी पड़ता है। जैसे उन्हें सुनने अगर देखने की समस्या होनी लगती है। लेकिन फिर भी इनके लिए यहां किसी डाक्टर की व्यवस्था नहीं की गई है। कई लोगों को स्वास्थ्य विकार होने के बाद यहां की नौकरी छोड़नी पड़ी है। साथ ही यहां तीनों शिफ्टों का प्रावधान है। लेकिन रात में काम करने वाले कर्मचारियों के लिए चाय तक व्यवस्था नहीं है।

हर संस्थान में एचआर विभाग होता है लेकिन मजे की बात यह है कि यहां पर ऐसा कोई विभाग नहीं है। एक सरकारी बाबू प्रशासनिक विभाग में बैठते है जो कि यहां के हनुमान है। सारा काम खुद ही कर डालते है। इन महाशय के कारण ही कईयों के पैसे लटके रह जाते है। भारत में सस्ता श्रम का फायदा पहले कारोबारी उठा रहे थे अब हमारी लोकतांत्रिक सरकार भी इसी रास्ते चल पड़ी है। खुद यहां के अधिकारियों का डीए तो बढ़ जाता है, लेकिन यहां के कर्मचारियों के कुछ नहीं मिलता है।
शोषण की कहानी जारी है.............................

निखिल युवा पत्रकार हैं। पत्रकारिता की पढ़ाई आईआईएमसी से।
अभी ईएमएमसी में काम कर रहे हैं। इनसे संपर्क का पता  nikhilbhusan@gmail.com है।