जिस्म 2 पर प्रेसवार्ता : सवालों से बिदके महेश भट्ट

-चंडीगढ़ कुलदीप मिश्र 

सब कुछ बताने से पहले एक बात 

मुझे अंदाजा नहीं था कि महेश भट्ट ऐसे घटिया तर्क देंगे और इतनी जल्दी सवालों से असहज हो जाएंगे। मेरे कुछ सवालों पर वह तू-तड़ाक पर उतर आए। धमकी भी दी कि 'बाहर मिल'। हाहाहा। मैं उपलब्धि समझता हूं इस बातचीत को। कि मेरे सवाल उन्हें उनके कम्फर्ट ज़ोन से बाहर लेकर आए। माफ़ कीजिएगा मैं गुडी गुडी जर्नलिस्ट नहीं हो पाऊंगा जो चाशनी में भिगोकर सवाल पूछता रहे


'पब्लिक टेस्ट और सेक्सुएलिटी का गेटकीपर कौन है? ऑडियंस कामुक चीजें देखना पसंद करती है। उन्हें यही चाहिए, जितना ज्यादा हो सके उतना चाहिए। इंडिया में सांस्कृतिक दोगलापन है।' 


ऐसे कितने फिल्ममेकर होंगे, जो रिपोर्टर के सवालों का जवाब तू-तड़ाक की भाषा में दें। पर महेश भट्ट उनमें से एक हैं। शुक्रवार को जब थिएटर में जिस्म-2 रिलीज हो रही थी, वह अपनी पूरी टीम के साथ चंडीगढ़ के एक क्लब में प्रेस कॉन्फ्रेंस करने पहुंचे। साथ में पूजा भट्ट, सनी लियोनी, रणदीप हुड्डा और अरुणोदय सिंह भी थे। समाज और सिनेमा के रिश्ते से बात शुरू हुई थी, फिर यलो जर्नलिज्म तक गई और अभद्रता पर ख़त्म हुई महेश ने मुझसे कहा, 'बाहर मिल, देखता हूं तुझे। तेरी नेट सर्फिंग चेक करता हूं सारी।'

महेश भट्ट से पूरी बातचीत इस तरह थी

आप जब न्यूज चैनलों पर बोलते हैं तो समझदारी भरी सोशल-पॉलिटिकल बातें करते हैं। वहां आपका अलग रूप दिखता है, पर आपकी फिल्मों में वो बात नहीं आ पाती। खास तौर से जैसी फिल्में आप पिछले कुछ सालों से बना रहे हैं। जिस्म-2 जिस समाज के बारे में है, क्या आप उसी समाज की बात करते हैं और वैसा ही समाज बनाना चाहते हैं?
आप तोते की तरह रटकर तो सवाल पूछ रहे हैं। 40 साल से ये पूछा जा रहा है। मैं फिल्मों से रोजी कमाता हूं। जब 'अर्थ' और 'सारांश' बनाता हूं तो आप तारीफ करते हैं, देखते नहीं हैं। देखते आप सिर्फ 'मर्डर' और 'जिस्म' हैं। हॉल बुक हो जाते हैं जब जिस्म-2 बनाता हूं। मतलब साफ है कि ऑडियंस ऐसी ही फिल्में चाहती है। पॉर्न इंडस्ट्री 100 बिलियन डॉलर की है, यानी कोई तो उसके लिए जेब ढीली कर रहा है। मैं फिल्में बनाता हूं, भारतीय कानून के दायरे में रहकर। क्या कोई फिल्म देखकर आपका जेहन खराब हुआ। सेंसर बोर्ड ने ए, यू, यूए जैसे सर्टिफिकेट किस लिए बनाए हैं। संविधान मुझे ऐसी फिल्में बनाने की इजाजत देता है। और अगर आपका कल्चर इतना कमजोर है कि एक फिल्म से टूट जाए तो मुझे आप पर तरस आता है।

सवाल कल्चर नहीं, सोसाइटी का था। ये तो चीजें बेचने की बौद्धिकता हुई। लोग जो चाहते हैं, हम वही परोसते हैं, इसी तर्क से लोग यलो जर्नलिज्म को भी जायज ठहराते हैं। आप उनसे सहमत हैं?
आप और कर क्या रहे हैं। आप वैसा ही जर्नलिज्म कर रहे हैं। आप समझते हैं कि भरी भीड़ में मुझे नीचा दिखा देंगे?

मेरा बिल्कुल ऐसा मकसद नहीं है। मेरी बात ख़त्म हो जाएगी, आप बस इतना बता दीजिए कि इसी तर्क से दुनिया की बहुत सारी सनसनीखेज चीजें जायज ठहरा दी जाती हैं। आप उन सबसे सहमत हैं?
भैया हम बहुत बुरे लोग हैं। हम ऐसी ही समाज खराब करने वाली फिल्में बनाएंगे। मैंने शैतान को पूजने की कसम खाई है, तुम ईश्वर को पूजते रहो। बरसों पहले एक बूढ़ा रिपोर्टर मिला था। वो भी ऐसा ही कह रहा था। तेरे जैसे बहुत देखे हैं। तू मिल मेरे को बाहर जरा। मैं देखता हूं। तेरी नेट सर्फिंग चेक करता हूं सारी।

अपना काम डिफेंड नहीं करना: पूजा भट्ट

पिता आइना दिखाते हैं 
वैसे तो पूजा का गला खराब था। शुरू में उन्होंने इसकी घोषणा भी की। पर सबसे ज्यादा बोली भी वहीं। 'जिस्म-2 लव ट्राएंगल है। उस प्यार के बारे में, जैसा रियल लाइफ में होता है। 'डम्ब डाउन' हिंदी फिल्मों की कहानियों की तरह नहीं, जहां माना जाता है कि सिर्फ बुरे लोग सेक्स करते हैं और अच्छे लोग प्यार करते हैं। इंडिया की पॉपुलेशन इतनी है, क्या हम बुरे लोग हैं? मुझे अपने काम को डिफेंड करने की जरूरत नहीं है।' इसी बात को आगे बढ़ाते हुए उन्होंने कहा कि सेक्सुएलिटी सिर्फ पुरुषों का ही अधिकार नहीं होती, महिलाओं का भी होती है। जिस्म-2 सिर्फ मर्दों के लिए बनी फिल्म नहीं है। बल्कि लड़कियों का ज्यादा अच्छा रिस्पॉन्स मिल रहा है। लोगों ने हमें बताया कि प्रोमो के आखिरी फ्रेम में वे सनी की बॉडी नहीं, उनकी सोल देख रहे हैं।

फिल्मों में आई, मेरी खुशनसीबी: सनी लियोनी

सनी को प्रोटेक्ट करते हुए चल रहे थे उनके पति डेनियल (नीली टी-शर्ट में)
सनी लियोनी बमुश्किल अंग्रेजी में दो लाइन बोल पाईं। पूरे वक्त वह स्माइल करते हुए कैमरों की ओर देखती रहीं। सवाल किया गया कि इस फिल्म के प्रोमो में जो दिख रहा है वो सब आपके लिए नया नहीं। फिर इस फिल्म में नया क्या था? इससे पहले कि वह जवाब देतीं, पूजा भट्ट बोल पड़ीं, 'फिल्म में जो सनी ने किया है वह उनके पिछले काम से बिल्कुल अलग है।' फिल्म में उनके लिए स्मिता नाम की एक डबिंग आर्टिस्ट ने आवाज दी है। हिन्दी डायलॉग के सवाल पर फिर से पूजा ने माइक ले लिया, 'सनी ने स्टूडेंट की तरह अपनी लाइन्स याद कीं।' आखिर में वह सनी बोलीं तो इतना कि किसी एक जॉनर से जुडऩा नहीं चाहूंगी। खुशी है कि फिल्मों में काम करने का मौका मिला।


कपड़े उतारने आसान हैं: रणदीप हुड्डा

मेरे अपने विचार हैं 
अपनी टीम में रणदीप हुड्डा ही थे जो एटीट्यूड नहीं दिखा रहे थे। हर बात संभलकर बोल रहे थे। उन्होंने कहा कि प्रोमो में जो दिख रहा है, फिल्म में उससे काफी ज्यादा चीजें हैं। सनी का रोल बड़ा होने की बात पर उनका कहना था कि कोई फिल्म एक कैरेक्टर के बारे में नहीं होती। हर कैरेक्टर किसी दूसरे कैरेक्टर और स्क्रिप्ट से जुड़ा होता है। जहां तक अहमियत का सवाल है, वो आपसे कोई छीन नहीं सकता। रोल से जुड़े एक और सवाल पर रणदीप बोले कि कपड़े उतारने बहुत आसान हैं, एक्टिंग में कई चीजें उससे मुश्किल हैं।

लव मेकिंग नहीं रोना मुश्किल रहा: अरुणोदय सिंह

जिस्म-2 में काम करना आसान था
अब तक बस चार फिल्मों में दिखे अरुणोदय नखरों में बड़े-बड़े स्टार्स को पीछे छोड़ रहे थे। बोले कि लव मेकिंग सीन करने में किसी तरह से असहज नहीं हुआ बल्कि रोने-धोने वाले सीन मुश्किल लगे। वैसे भी ये तो हमारा काम है। जैसे लोग अपना प्रफेशन एंजॉय करते हैं, हम अपनी एक्टिंग। फिल्म की हीरोइन के सामने उनके रोल के साइज पर बात हुई तो उन्होंने कहा कि फिल्म की शुरुआत में अगर ये सोचने लगता कि सनी को ज्यादा फुटेज मिलेगी, तो फिर घर बैठना ही ठीक था।





कुलदीप युवा पत्रकार हैं. पत्रकारिता की पढाई भारतीय जन संचार संसथान से.अभी दैनिक भास्कर (चंडीगढ़) में काम. इनसे संपर्क का पता kdmishra.du@gmail.com है