लन्दन ओलंपिक : अपनों से उम्मींद

-प्रवीण द्विवेदी

वैसे तो ओलंपिक खेलों में भारत का प्रदर्शन उतना प्रभावी नहीं रहता जितना अमेरिकाआस्ट्रेलियाचीन और जापान जैसे दिग्गज देशों का होता हैं। फिर भी हर बार की ही तरह हम अपने सूरमाओं से पदक की उम्मीद लगा लेते हैं। हां वो हमारी  उम्मीदों पर कितना खरा उतरते हैं यह वक्त और विरोधी खिलाडियों का प्रदर्शन तय करता है। खैर2008  बीजिंग ओलंपिक के बाद हमारी इन उम्मीदों को थोड़ा और पंख लग गए हैं। पिछले ओलंपिक में हमने एक स्वर्ण सहित तीन पदक  क्या जीते कि हम भारतीयों का सीना गर्व से फूल गया। इस भौतिक गर्व के पीछे  एक और उम्मीद अंकुरित होने की तैयारी में थी। 2008  ओलंपिक के समापन के बाद  हमारे एथलीटों और ओलंपिक संघ में सत्तासीन अधिकारियों ने यह मान लिया कि  आगामी ओलंपिक (लंदन ओलंपिक) में हम और बेहतर प्रदर्शन करेंगे। उनकी यह उम्मीद वाजिब भी है। एक भारतीय होने के नाते हमओलंपिक के एक आध खेलों में अपने तिरंगे को पदक विजेता देश के झंड़ों में शामिल करने की तो सोच ही सकते हैं। इस उम्मीद के हिसाब से हम यह तो मान ही सकते हैं कि हम इस बार तीन से ज्यादा पदकों पर अपना कब्जा जमा पाएंगे।



लंदन ओलंपिक भारत के लिए इस बार बेहद खास हो सकता है अगर अपने सूरमा अपने विरोधियों को सही दांव से सही समय पर चित कर दें। इस बार के ओलंपिक  में अपना देश तेरह प्रतियोगिताओं के जरिए पदक रेस में शामिल है। हम कुश्तीमुक्केबाजीनिशानेबाजीतीरंदाजीटेनिसतैराक चक्का फेक बैडमिंटन त्रिकूदभारोत्तोलन,हॉकीशूटिंगनौकायन में अपनी जोर आजमाइश करेंगे। इसी जोर आजमाइश के दौरान अगर एक आध पदक भारत के खाते में जुड़ जाए तो सोने पे सुहागा ही होगा। कुश्ती में हमारे महाबली सतपाल द्वारा छत्रसाल अखाड़े में तराशे गए तीन पुरुष पहलवानों (सुशील कुमारयोगेश्वर दत्त और अमितपर तो भारत के लिए पदक निकालने की जिम्मेदारी तो होगी ही साथ ही भारत की एकमात्र महिला पहलवान गीता फोगट भी अपनें दांव से विरोधी को चितकर एक पदक निकालने की कोशिश करेंगी। कुश्ती में अगर एक भी पदक निकलता है तो यह बहुत बड़ी उपलब्धि होगी।



अगर बात अपने पंचिग उस्तादों की करें तो विजेंद्र और मैरीकॉम में से सिर्फ मैरीकॉम से पदक की उम्मीद की जा सकती है। निशानेबाजी में हमारे तीन योद्धाओं (अभिनव बिंद्रागगन नारंग और रोंजन सोढ़ीपर देश की नजर होगी। ये तीनों निशानेबाज कोच सन्नी थामस की देखरेख में अपने लक्ष्य को साध कर पदक सुनिश्चित करने का प्रयास करेंगे। वहीं तीरंदाजी में सबकी नजर दीपिका पर होंगीअगर दीपिका अपना निशाना साधने में कामयाब होती हैं तो तीरंदाजी में एक पदक तो भारत की झोली में आना तय है। टेनिस में लिएंडर पेसमहेश भूपतिरोहन बोपन्नाविष्णु वर्धनसानिया मिर्जा और रश्मि चक्रवर्ती समेत बड़ी टीम लंदन ओलंपिक में खेलने वाली है। लेकिन पुरुष युगल और मिश्रित युगल के लिए जोड़ीदार चयन विवाद ने टेनिस कोर्ट में ऐसा रायता फैलाया कि इस ओलंपिक में टेनिस से एक पदक निकलना दूर की कौड़ी लगता है। 

पानी के खेल में यानी तैराकी में कर्नाटक के गगन एपी उलालमथ एकमात्र भारतीय उम्मीद हैं। वैसे तो तैराकी में भारतीय खिलाड़ी को ओलंपिक टिकट मिलना ही बड़ी उपलब्धि है फिर वो चाहे वैश्विक कोटे से ही क्यों न मिला हो। अगर तैराकी में पदक निकलता है तो चमत्कार ही कहा जाएगा। वहीं कृष्णा पूनिया चक्का फेंक प्रतियोगिता में प्रमुख भारतीय दावेदार है। इस ओर से भी पदक आने की आस बहुत कम ही है। हां अगर पूनिया कोई चमत्कार कर दें तो कुछ कहा नहीं जा सकता। हां बात अगर बैडमिंटन की करें तो सायना नेहवालज्वाला गुट्टाअश्विनी पोनप्पा में से कोई एक तो भारत के लिए पदक लाएगा ही। फिर वो चाहे सायना के रैकिट से निकले या गुट्टा के। हॉकी में अपनी टीम 8 साल बाद ओलंपिक में शिरकत कर रही है। बीजिंग ओलंपिक में न खेलने की टीस टीम के एक एक खिलाड़ी को आज भी होगी। यह टीस अगर एक पदक में बदलती है तो ध्यानचंद की आत्मा को सुकून मिल जाएगा जिनके रहते भारतीय हॉकी हमेशा दिग्गज टीमों में शामिल रही। 

यह लंदन ओलंपिक का भारतीयों के आंखों में कितनी मुस्कान या कितने आंसू लाएगा यह तो वक्त ही बताएगा हम तो बस अपनों से एक उम्मीद ही कर सकते हैं।



प्रवीण युवा पत्रकार हैं. अभी दिल्ली से प्रकाशित एक दैनिक  अखबार में काम .पत्रकारिता की  पढ़ाई आईआईएमसी से. इनसे संपर्क का पता pdwivedi893@gmail.com> है.