आरा में गुस्साए दलित छात्रों ने आयोग के अध्यक्ष के मुंह पर कालिख पोती

-सरोज कुमार 

कालिख पुतने के बाद नेता जी
रकार और प्रशासन की निष्क्रियता से गुस्साए आरा के दलित छात्रों ने गुरुवार (12जूलाई) को बिहार अनुसूचित जाति आयोग के अध्यक्ष विद्यानंद विकल के मुंह पर कालिख पोत दिया। विद्यानंद विकल आरा के दलित छात्रावास आए हुए थे। आरा दलित छात्रावास के गुस्साए छात्रों ने उनको जूतों की माला भी पहना दी। दलित छात्रावास पर हमले के 42 दिन बीत जाने के बाद भी आवश्यक कार्रवाई न होने से नाराज थे।

ब्रमेश्वर मुखिया की हत्या के दिन(1जून) को ही दलित छात्रावास को बुरी तरह जला दिया गया था। छात्रों के साथ मार-पीट के साथ ही सर्टिफिटेक-किताबों के साथ-साथ जरुरत के सामानों को भी जला दिया गया था। छात्रावास की राहत-मरम्मती के साथ ही मुआवजा न मिलने के कारण छात्र गुस्से में हैं। छात्रों का कहना है कि इतने दिन बीत जाने के बाद भी सरकार या प्रशासन की ओर से आश्वासन के सिवाय कुछ नहीं मिला। घटना के बाद पहले तो उन्हें छात्रावास छोड़ घर भेज दिया गया था। छात्रों की पहल पर ही उन्हें वहां रहने की अनुमति मिली। फिर कोई कार्यवाई न होती देख उन्होंने 18 जून को आरा में डीएम का और फिर 20 जून को पटना में प्रदर्शन किया। डीएम से लेकर कल्याण मंत्री तक ने जल्द उचित कार्यवाई करने और सर्टिफिटेक उपलब्ध कराने का आश्वासन दिया था। मुआवजे तक की बात कही गई थी। लेकिन इतने दिन बीत जाने के बाद भी सरकार या प्रशासन की ओर से कोई सहायता पहुंचाने और दोषियों के खिलाफ कार्यवाई करने की कोशिश नहीं की गई। छात्रों से काफी दबाव बनने के बाद डीएम ने बीच में छात्रावास का मुआयना भी किया पर आश्वासन तक ही सीमित रहीं।

छात्रों का आरोप है कि छात्रावास को जलाने में जदयू-भाजपा के स्थानीय कार्यकर्ता शामिल थे। इसी कारण सरकार राजनीतिक दबाव के कारण ही कोई कार्यवाई नहीं कर रही है। जबकि सरकार ब्रह्मेश्वर मुखिया की हत्या की सीबीआई जांच करवाने तक तैयार हो जाती है। सरकार में शामिल लोग ब्रह्मेश्वर मुखिया के भोज तक में शामिल होते हैं। सरकार के खिलाफ इसी कारण छात्र गुस्से में हैं और घटना के काफी दिन बीत जाने पर जदयू के एक नेता के आने पर छात्रों ने छात्रावास में घुसने नहीं दिया था।

छात्र अपनी सुरक्षा को लेकर भी चिंतित हैं। छात्रों की पहली मांग यहीं थी कि छात्रावास में मेन गेट की व्यवस्था की जाए और चहारदीवारी उंची की जाए। पर कोई ध्यान नहीं दिया गया। जबकि विद्यानंद विकल के के आने के करीब 4-5 घंटे पहले (गुरुवार, 12जुलाई को) ही करीब सुबह 10 बजे स्थानीय दो बाहरी युवक छात्रावास में नशा करते पाए गए। छात्रों का आरोप है कि वहां आने का कारण पूछने पर उन दोनों ने छात्रों को धमकी दी और कहा,एक बार जलाने से असर नहीं पड़ा तुम लोगों पर, फिर सबक सिखाना पड़ेगा क्या। गुस्सें में एकजुट हो कर छात्रों ने उन दोनों को पकड़ कर पीटा और पुलिस के हवाले कर दिया।

इसी के बाद करीब दो-ढ़ाई बजे दोपहर में विद्यानंद विकल आए और छात्रों के गुस्से का शिकार हुए। इतने दिन बीत जाने के बाद भी प्रशासनिक निष्क्रियता और असुरक्षा के डर से ही छात्र भड़के हुए थे। विद्यानंद के आने की खबर पाते ही छात्र जदयू का प्रदेश अध्यक्ष जितेंद्र पाठक और जिला अध्यक्ष सुनील पाठक छात्रावास आ रहा था, जिन्हें छात्रों ने घुसने नहीं दिया। छात्रों का आरोप इन्हीं जदयू-भाजपा के कार्यकर्ताओं पर ही है।

छात्रों का कहना है कि वे राज्य सरकार को, नीतीश कुमार को संदेश देना चाहते हैं कि जबतक ठोस कार्यवाई नहीं की जाती वे सरकारी नेताओं का विरोध करेंगे। छात्रों ने कहा कि चाहे नीतीश कुमार हों या जदयू-भाजपा के अन्य नेता वे उनका विरोध करेंगे, क्योंकि हमले में जदयू-भाजपा के कार्यकर्ता ही शामिल थे और सरकार कोई कार्यवाई नहीं करना चाह रही। पहले सरकार दोषियों के खिलाफ कार्यवाई, छात्रों की सुरक्षा, सर्टिफिटेक और मुआवजे का प्रबंध करे।