शहीदों की परम्परा को आगे बढ़ाते हुए, ग्रीन हंट के खिलाफ संघर्ष तेज करो विषयक संगोष्ठी

-बबीता उप्रेती 

संगोष्ठी को संबोधित करते वरवर राव 
"नक्सलबाड़ी के क्रांतिकारी सशस्त्र  किसान संघर्ष से लेकर आज तक देश के कोने-कोन में हजारों कामरेडों  ने सामन्तवाद-साम्राज्यवाद के विरूद्ध  संघर्ष  में अपने प्राणों की आहूति दी है। हमारे कामरेडों की हत्याकर  शोशक- शाशक वर्ग हमारे संघर्षों को, हमारी क्रांति को रोकने का और खत्म कर देने का दिवास्वप्न देख रहे हैं। परन्तु शहीदों के शरीर से बहा लहू कभी व्यर्थ नहीं जाता, वह रक्तबीज बनकर विराट रूप धारण करता है।" 

ये विचार 'शहीदों की परम्परा को आगे बढ़ाते हुए, ग्रीन हंट के खिलाफ संघर्ष तेज करो वियक संगोष्ठी और सम्मेलन में विभिन्न वक्ताओं द्वारा व्यक्त किए गए।  संगोष्ठी और सम्मेलन का आयोजन आन्ध्र प्रदेश के सुन्दरैया विज्ञान भवन के सभागार में 18-19 जुलाई 2012 को 'शहीदों की बंधु मित्र संघम' द्वारा किया गया। 

18 जुलाई  को सिकन्दराबाद के सुभा नगर के 'लाल झण्डा बस्ती में 12 बजे से कार्यक्रम की शुरूआत हुई। वंहा आन्ध्र प्रदेश के वारंगल, करीमनगर, नलगुण्डा, महबुबनगर, आदीलाबाद, निजामाबाद, गुण्टुर, विजयवाड़ा, करनुल, अन्तपुर से सैकड़ों की संख्या में शहीदों के परिजन, बुद्धिजीवी, आम नागरिक उपस्थित थे। एक जगह हजारों शहीदो की शहीद वेदी बनी बनी हुर्इ थी। वेदी के चारों तरफ लाल झंडा तथा लाल बैनरों से सजा दिया गया था। हाल ही में छत्तीसगढ़ में शहीद हुर्इ लक्ष्मी के पिता ने लाल झण्डा फहराया। इसके बाद शहीद वेदी का अनावरण किया गया। और भारत की नवजनवादी क्रांति के लिए शहीद हुए साथियों को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए दो मिनट का मौन रखा गया। सभी लोगों ने शहीद वेदी पर माल्यापर्णण किया, और क्रानितकारी गीत गाए गए। शहीदों का अभिवादन करते हुए लोगों में आंसू उमड़ आए और उन्होंने साम्राज्यवाद मुर्दाबाद, शहीदों को लाल सलाम कहते हुए गीतों से उन्हें और भी गुंजायमान कर दिया। 

दूसरे दिन 11 बजे से सुन्दरैया विज्ञान भवन में कार्यक्रम का प्रारम्भ हुआ। कार्यक्रम में का. गोरू माधव राव को श्रंदाजलि दी गर्इ। जिनकी अभी हाल ही में मृत्यु हुर्इ थी। का. गोरू माधव ने माओवादी आंदोलन का आजीवन समर्थन किया और वे 'शहीदों की बंधु मित्र संघम के फाउण्डर मेंबरों से भी एक थे। 

कश्मीर से आयी हुर्इं परवीना ए हंगर ने कहा कि 1990 में अर्धसैनिक बलों ने उनके बेटे को उग्रवादी कहकर उठा लिया और उसके बाद उन्हें पता नही चल पाया कि उनका बेटा कहां है। आज इस घटना को 22 साल हो गए हैं। इस घटना ने उन्हें अंदर तक हिला दिया लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी और 'गायब हुए व्यकितयों के माता-पिता का संगठन बनाया और लंबे समय तक उसमें काम करती आ रही हैं। उन्होंने कहा कि लोग कश्मीर को जन्नत समझते हैं लेकिन वह जहन्नुम बन गया है। आज वहां दस हजार युवक गायब हैं। हम लोग कोर्ट कचहरी सभी जगह गए लेकिन कहीं से हमें न्याय नहीं मिलता। उन्होंने बताया कि पिछले साल 105 युवको को गोली मार दी। आप समझ सकते है कि कश्मीर की जनता किन हालातों में रह रही है। उन्होंने कहा आम नागरिक के लिए कानून है लेकिन जो लोग खून से सने हुए है और आए दिन हत्याएं कर रहे हैं उनके लिए कोर्इ कानून नहीं है। वे आंध्र प्रदेश आकर यहां के लोगो का दु:ख समझ पार्इ हैं। और देश में कोर्इ भी राज्य ऐसा नहीं है जहां आम जनता को कड़े कानूनों के तहत जेल मे डाल दिया जा रहा है या आंतकवादी कहकर मार दिया जा रहा है। उन्होंने कहा हम सब का एक दुख है और हमें एक होकर लड़ना चाहिए तभी हमारी लड़ार्इ आगे बढ़ सकती है। 

मंच से बोलते हुए वक्ताओं ने कहा कि देश का शासक वर्ग साम्राज्यवाद द्वारा सीधे निर्देशित हो रहा है और उसी के अनरूप नीतियां बनाकर देश के तमाम संसाधन, स्रोत  व भूमि बहुराष्ट्रीय कम्पनियों व बडे़ पूंजीपतियों को बेची जा रही है। छत्तीसगढ़, उड़ीसा, झारखण्ड, आंध्र प्रदेश, पश्चिम बंगाल में इसके चलते लाखों लोग आजीविका से वंचित कर दिया और अपनी ही भूमि से उन्हें विस्थापित होने को मजबूर किया जा रहा है। कश्मीर से लेकर नागा, मिजो, मणिपुरी, असमी समेत तमाम राष्ट्रीयताएँ अपने षोशण-उत्पीड़न के खिलाफ और आजादी, मुकित, पहचान, आत्मनिर्णय के अधिकार के लिए लड़ रही है। इनके संघर्षों पर अर्धसैनिक बलों एवं भारतीय सेना के हमले लगातार जारी है। हम तमाम राष्ट्रीयताओं के शहीदों के प्रति अपनी सहानुभूति, सम्मान एवं श्रद्धा व्यक्त करते हैं। साथ ही हम इनके संघर्षों के प्रति एकजुटता का ऐलान करते हैं। आगे बोलते हुए वक्ताओं ने कहा कि आज देश के विभिन्न जेलों में हजारों की संख्या में संघर्षशील जनता को और उसका नेतृत्व करने वालों को काले कानूनों के तहत कैद किया जा रहा है। अफजल गुरू को फांसी की सजा सुनाना, सीमा आजाद व उनके हमसफर विश्वविजय को उम्र कैद की सजा सुनाना शोषक-शासक वर्गों का राजनीतिक बदला लेने और संघर्ष को दबाने का हथकण्डा है।

उसी दिन हैदराबाद  के प्रेस क्लब में एक प्रेस वार्ता रखी गयी। प्रेस में बोलते हुए क्रान्तीकारी लेखक व आरडीएफ के अध्यक्ष वरवर राव ने बताया कि छत्तीसगढ़ से 'जन चेतना नाटय मंच के 17 सदस्यों की एक टीम सम्मेलन मे शिरकत करने आ रही थी और उन्हें आन्ध्र प्रदेश की पुलिस ने गिरफतार कर जेल भेज दिया, और साथ ही एपीसीएलसी के दो सदस्यों को भी गिरफतार किया गया। राव ने इस गिरफतारी की कड़ी निंदा की और उन्हें बिना शर्त रिहा करने की मांग की। आगे वरवर राव ने कहा कि कश्मीर में आए दिन युवकों को आतंकवादी कहकर गिरफतार किया जा रहा है या उनको फर्जी मुठभेड़ में मारा जा रहा है। इस बात की भी उन्होंने घोर निंदा की। बासीगुडा के बर्बर हत्याकांड में में बोलते हुए वीवी ने कहा कि कोर्इ अगर माओवादी भी है तो क्या उसे मार दिया जाना चाहिए। क्या माओवादी कोर्इ अपराधी, डाकू या इस देश के सबसे बडे दुश्मन हैं जो इस तरीके से दमन चलाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि बासीगुडा में हुए नरसंहार के एक स्वतंत्र जांच की जानी चाहिए। सम्मेलन में शहीदों पर कुछ किताबों का अनावरण भी किया गया। 

इस सम्मेलन में देश-प्रदेश के जनवादी संगठनों ने भी भागीदारी की। इनमें कश्मीर से गायब हुए युवकों के माता-पिता का संगठन, आंध्र प्रदेश सिविल लिबट्री, विरसम (क्रांतिकारी लेखक संघ), प्रजा कला मण्डलीय , चेतन्या महिला समाख्या, तेलगांना प्रजा फ्रंट, प्रगतिशील कामगार समाख्या, रिवल्यूशनरी डेमोक्रेसी फ्रंट, राजनैतिक कैदियों की बंदी रिहार्इ संगठन, तेलगांना विघार्थी वेदिका। कार्यक्रम में 300 से अधिक की संख्या में विभिन्न संगठनों के कार्यकर्ताओं, बुद्धिजीवियों और आम नागरिकों ने शिरकत की। 

बबीता पत्रकार  हैं. वामपंथी  आन्दोलनों से जुडाव. इनसे babitapth@gmail.comपर संपर्क किया जा सकता है.